कफ सिरप कांड: अरबों की तस्करी छुपाने के लिए MLC बनना चाहता था शुभम जायसवाल, STF की बड़ी कार्रवाई

पुलिस और Special Task Force (STF) ने खुलासा किया है कि वाराणसी का शुभम जायसवाल जो कि भारी मात्रा में नशीले कफ सिरप के अरबों के कारोबार की तस्करी में संलिप्त है , नशे के कारोबार को छुपाने व अपना नेटवर्क मजबूत करने के लिए विधायिक परिषद (MLC) बनना चाहता था। बताया जा रहा है कि उसने पूर्वांचल के बाहुबलियों से राजनीतिक गठबंधन और समर्थन जुटाने की कोशिश की थी ताकि उसकी अवैध गतिविधियों पर से पर्दा गिर सके। 

कफ सिरप कांड: अरबों की तस्करी छुपाने के लिए MLC बनना चाहता था शुभम जायसवाल  STF की बड़ी कार्रवाईकफ सिरप तस्करी:  पुलिस और Special Task Force (STF) ने खुलासा किया है कि वाराणसी का शुभम जायसवाल जो कि भारी मात्रा में नशीले कफ सिरप के अरबों के कारोबार की तस्करी में संलिप्त है , नशे के कारोबार को छुपाने व अपना नेटवर्क मजबूत करने के लिए विधायिक परिषद (MLC) बनना चाहता था। बताया जा रहा है कि उसने पूर्वांचल के बाहुबलियों से राजनीतिक गठबंधन और समर्थन जुटाने की कोशिश की थी ताकि उसकी अवैध गतिविधियों पर से पर्दा गिर सके।

गिरफ्तारी और जांच — कौन गिरफ्तार हुआ 

STF ने उसके करीबी साथी अमित सिंह ‘टाटा’ को गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि अमित सिंह ‘टाटा’ ही शुभम के नेटवर्क का एक अहम लिंक था, जिसके जरिए तस्करी और वितरण की गतिविधियाँ संचालित होती थीं। इसके साथ ही अन्य सहयोगियों के खिलाफ भी कार्रवाई चल रही है — यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नशे के कारोबार में और कौन-कौन शामिल था और किन लोगों ने इस तस्करी नेटवर्क की मदद की। एक राजनेता को गिफ्ट करने के लिए लग्जरी टोयोटा लैंड क्रूजर गाड़ी भी खरीदी थी। वहीं, STF के बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह की भूमिका की भी गहनता से पड़ताल हो रही है। जांच में उसकी कुछ कंपनियों की जानकारी मिली है। वह लगातार शुभम और अमित सिंह टाटा के संपर्क में था।

तस्करी का दायरा और राजनीति का जुड़ाव

शुभम जायसवाल करोड़ों रुपये के कोडीन युक्त कफ सिरप को अवैध रूप से उत्तर प्रदेश में फैला रहा था। उसकी यह तस्करी सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं — आरोप है कि उसका नेटवर्क कानूनी और राजनीतिक संरक्षण पाने की कोशिश में था। वहीं, योगी सरकार द्वारा चलाए जा रहे ड्रग-नियंत्रण अभियानों के बीच यह मामला एक बड़ा झटका माना जा रहा है। वहीं शुभम जायसवाल के खिलाफ गाजियाबाद से लुक आउट सर्कुलर जारी हो चुका है ताकि वह दुबई से किसी अन्य देश में नहीं भाग सके। उसके बाकी पार्टनर की भी जांच की जा रही है।

आरोपी का मकसद — सिर्फ जात-पात या राजनीतिक प्रभाव नहीं

विश्लेषकों का कहना है कि गरीब व युवाओं को प्रभावित करना, कफ सिरप व अन्य नशीली दवाओं को “दवा” का रूप देकर चलाना, और सामाजिक भय पैदा करना , यह सब शुभम व उसके सहयोगियों की रणनीति थी। MLC बनकर उसे न सिर्फ राजनीतिक इज़ाज़त मिल जाती, बल्कि उसकी सम्पत्तियों व तस्करी नेटवर्क की जांच से बचने की राह भी खुल जाती।
इस तरह साबित हो रहा है कि यह सिर्फ एक तस्करी नेटवर्क नहीं बल्कि सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर सक्रिय एक संगठित गिरोह था।

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