TV Industry Crisis: भारतीय मीडिया परिदृश्य में एक अभूतपूर्व बदलाव देखा जा रहा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के नवीनतम आंकड़ों और प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले तीन वर्षों (2023-2025) में भारत में 50 से अधिक टीवी चैनलों ने अपने ब्रॉडकास्टिंग लाइसेंस सरेंडर कर दिए हैं। वर्तमान में देश में 916 टीवी चैनल डाउनलिंकिंग के लिए उपलब्ध हैं, लेकिन बड़े नेटवर्कों द्वारा लाइसेंस वापस करना एक गंभीर संकेत है। इस गिरावट का मुख्य कारण दर्शकों का ‘लीनियर टीवी’ (पारंपरिक केबल/DTH) को छोड़कर डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल और इंटरनेट से जुड़े ‘कनेक्टेड टीवी’ की ओर पलायन करना है। विज्ञापन राजस्व में कमी और उच्च परिचालन लागत ने ब्रॉडकास्टर्स को अपने कम मुनाफे वाले या छोटे क्षेत्रीय चैनलों को बंद करने पर मजबूर कर दिया है, जिससे टीवी इंडस्ट्री के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है।
किन बड़े खिलाड़ियों ने पीछे खींचे कदम?
TV Industry लाइसेंस सरेंडर करने वालों में केवल छोटे खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि TV Industry के दिग्गज भी शामिल हैं:
JioStar (Viacom18 और Star का विलय): आंतरिक व्यापारिक निर्णयों के चलते Colors Odia, MTV Beats, VH1 और Comedy Central जैसे स्थापित चैनलों के लाइसेंस सरेंडर किए गए।
Zee Entertainment: अपने कुछ चैनलों जैसे Zee Sea को बंद करने का निर्णय लिया।
ABP Network: हाई ऑपरेटिंग कॉस्ट और कम मोनेटाइजेशन के कारण ABP News HD का लाइसेंस वापस किया।
NDTV: अपने प्रस्तावित चैनल NDTV Gujarati की योजना को फिलहाल टाल दिया है।
अन्य: TV Today Network, Eenadu Television और Enter10 Media (दंगल) ने भी Dangal HD और Dangal Oriya जैसे चैनलों के प्लान रद्द कर दिए हैं।
संकट के प्रमुख कारण: डिजिटल क्रांति और बदलता व्यवहार
उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव: लोग अब निश्चित समय पर टीवी के सामने बैठने के बजाय OTT प्लेटफॉर्म्स (Netflix, JioCinema, Disney+ Hotstar) पर ‘ऑन-डिमांड’ कंटेंट देखना पसंद कर रहे हैं।
DTH सब्सक्राइबर्स में भारी गिरावट: Crisil की रिपोर्ट के अनुसार, प्राइवेट TV Industry DTH ग्राहक जो वित्त वर्ष 2019 में 72 मिलियन थे, वे 2024 तक घटकर 62 मिलियन रह गए हैं। अनुमान है कि 2026 तक यह संख्या 51 मिलियन से नीचे गिर जाएगी।
विज्ञापन राजस्व (Ad Revenue) का गिरना: WPP के अनुमान के मुताबिक, 2025 में टीवी विज्ञापन राजस्व 1.5% गिरकर ₹477.4 बिलियन रह जाएगा। जबकि कुल विज्ञापन बाजार बढ़ रहा है, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा अब डिजिटल विज्ञापनों की झोली में जा रहा है।
लागत और नियम: TV Industry चैनलों के लिए लाइसेंस फीस, अपलिंकिंग कॉस्ट और कड़े सरकारी नियम इसे खर्चीला बनाते हैं, जबकि डिजिटल माध्यमों पर फिलहाल नियमों का बोझ तुलनात्मक रूप से कम है।
क्या वाकई टीवी का खेल खत्म हो रहा है?
यह कहना जल्दबाजी होगी कि TV Industry पूरी तरह खत्म हो रहा है, लेकिन यह निश्चित है कि टीवी अब अपने “अस्तित्व के परिवर्तन” के दौर से गुजर रहा है।
अभी भी भारत में 900 से अधिक चैनल सक्रिय हैं और बड़े न्यूज व GEC (General Entertainment Channels) जैसे स्टार प्लस या आज तक की पकड़ मजबूत है। हालांकि, ‘Niche’ (विशेष विषय वाले) और क्षेत्रीय चैनलों के लिए संघर्ष बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य “हाइब्रिड मॉडल” का है, जहाँ ब्रॉडकास्टर्स खुद को डिजिटल दिग्गजों के रूप में ढाल रहे हैं। अब युद्ध टीवी स्क्रीन बनाम मोबाइल स्क्रीन का नहीं, बल्कि कंटेंट का है। जो कंटेंट डिजिटल पर आसानी से उपलब्ध है, उसके लिए दर्शक केबल का बिल भरना बंद कर रहे हैं।



