
प्रस्ताव के पीछे क्या वजह है?
वर्तमान व्यवस्था में जिलों एवं Municipal Corporation of Delhi (MCD) ज़ोन — दोनों की सीमाएं और कार्यक्षेत्र अलग-अलग हैं, जिससे अक्सर प्रशासनिक जटिलताएँ, दफ्तरों के चक्कर, और दफ्तर-जोन विवाद होते थे। नए प्रस्ताव के अनुसार, जिलों की सीमाएं MCD जोन के आधार पर पुनर्निर्धारित की जाएँगी। इससे विभागों के बीच समन्वय आसान होगा, और नागरिकों को सरकारी सेवाओं के लिए कम दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे। साथ ही, सब-डिवीजन (SDM ऑफिस) की संख्या भी बढ़ाई जाएगी — जो अब 33 से बढ़कर 39 होगी। इससे प्रशासनिक दायरे छोटे होंगे और सेवाओं की उपलब्धता जल्दी होगी। राजस्व विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, दिल्ली के नौ जिलों के नए नाम सुझाए गए हैं। जो सिविल लाइंस, करोल बाग, रोहिणी, नरेला, नजफगढ़, सिटी सदर, केशवपुरम, नॉर्थ शाहदरा और साउथ शाहदरा हैं। वहीं, सेंट्रल, न्यू दिल्ली, साउथ और वेस्ट जिलों के नाम बिना बदलाव के प्रस्ताव में शामिल किए गए हैं।
कौन से नए जिले बनेंगे
राजस्व विभाग के मसौदे में कुल 9 जिलों के नाम बदलने या नए नाम सुझाने की सिफारिश की गई है। प्रस्तावित नए नामों में प्रमुख हैं: Karol Bagh, Rohini, Narela, Najafgarh, City Sadar, Keshavpuram, North Shahdara और South Shahdara। वहीं, कुछ पुराने जिलों के नाम अपरिवर्तित रहेंगे — जैसे Central Delhi, New Delhi, South Delhi और West Delhi।
क्या होगा लाभ — जनता के लिए क्या मायने
इस पुनर्गठन से सरकारी कामकाज में तेजी आएगी — दफ्तर-जोन विवाद कम होंगे, लोगों को कम दफ्तरों का चक्कर लगाना पड़ेगा।सब-डिविजन की संख्या बढ़ने से प्रशासनिक पहुँच हर इलाके के करीब होगी — यानी अब SDM कार्यालयों तक पहुंच आसान होगी। जिन हिस्सों में पहले सीमाओं का विवाद या overlapping हुआ करता था, उन इलाकों में अब स्पष्ट सीमांकन हो जाएगा — चाहे वो ज़ोन हो या डिस्ट्रीक्ट।
प्रस्ताव को राज्य कैबिनेट ने सैद्धांतिक मंजूरी दी है। अब यह प्रस्ताव उप-राज्यपाल (Lieutenant Governor) की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। यदि सब कुछ ठीक रहा, तो जल्द ही नए जिलों और सब-डिवीजन के साथ यह बदलाव लागू हो जाएगा।