
चुनाव को लेकर सभी प्रमुख दल—BJP , AAP और कांग्रेस पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुके हैं। कुल 51 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला है, जिनमें बड़ी संख्या में महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं। शिवालिक, अशोक विहार, शालीमार बाग-बी, द्वारका-बी, चांदनी चौक, नरेला, मुंडका और संगम विहार-ए जैसे वार्ड राजनीतिक रूप से खासे चर्चित हैं, जहाँ प्रत्याशियों की जीत या हार का सीधा असर बड़े दलों की साख पर पड़ेगा। विधानसभा चुनाव के बाद यह पहली बार है जब जनता तीनों दलों के बीच सत्ता और प्रभाव को लेकर खड़ा मुकाबला देख रही है, इसलिए परिणाम आने तक राजधानी की राजनीतिक हलचल तेज रहने की उम्मीद है।
मौके पर प्रशासन ने मतदाताओं को सुविधा देने के लिए कई इंतजाम किए हैं। भीड़ वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा तैनात है और बूथों पर वोटरों की पहचान और प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए डिजिटल सिस्टम लागू किए गए हैं। मतदान शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है और चुनाव आयोग ने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में वोट डालने की अपील की है। ये सीटें न केवल निगम की संरचना को प्रभावित करेंगी, बल्कि यह भी दिखाएंगी कि विधानसभा चुनाव के बाद दिल्ली का राजनीतिक रुझान किस ओर झुक रहा है, जनता का समर्थन बदला है या पुराना विश्वास अभी भी कायम है।
BJP ने सबसे ज़्यादा 8 महिला उम्मीदवार उतारे हैं, उसके बाद AAP (6) और कांग्रेस (5) का स्थान है। इस चुनाव पर कड़ी नज़र रखी जा रही है क्योंकि फरवरी में हुए विधानसभा चुनावों के बाद AAP और BJP एक बार फिर आमने-सामने होंगे।
BJP पार्टी ने 70 में से 48 सीटें जीतकर 27 साल बाद दिल्ली की सत्ता में वापसी की और AAP को सत्ता से बेदखल कर दिया। दिल्ली नगर निगम (MCD) के 12 वार्डों में से नौ पहले भाजपा के और तीन आप के पास थे।