Sunday Sleep Habits:हफ्तेभर सुबह अलार्म बजते ही उठने वाले लोगों को रविवार को बिस्तर छोड़ने का मन नहीं करता। कई लोग छुट्टी के दिन दोपहर तक सोते रहते हैं। घर में लोग इसे आलस समझ सकते हैं, लेकिन इसके पीछे शरीर की थकान और नींद की कमी बड़ी वजह हो सकती है। दरअसल, सोमवार से शनिवार तक काम, तनाव और भागदौड़ के बीच जब पर्याप्त नींद नहीं मिलती, तो शरीर उसकी भरपाई करने की कोशिश करता है। यही वजह है कि रविवार को देर तक सोने का मन करता है।
नींद की कमी का हिसाब
कामकाजी दिनों में बहुत से लोग अपनी जरूरत के मुताबिक नींद नहीं ले पाते। किसी को ऑफिस जल्दी पहुंचना होता है, तो किसी को सुबह बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी करनी होती है। वहीं रात में मोबाइल चलाने, टीवी देखने और घर के दूसरे कामों के कारण सोने का समय लगातार पीछे खिसकता रहता है।
इसका असर धीरे-धीरे शरीर पर पड़ता है। मान लीजिए किसी व्यक्ति को रोज आठ घंटे सोने की जरूरत है, लेकिन वह केवल छह घंटे सोता है। ऐसे में हर दिन दो घंटे की नींद कम हो जाती है। सप्ताहभर में यह कमी काफी बढ़ सकती है।
सोमवार से शनिवार तक जिम्मेदारियां और अलार्म लोगों को बिस्तर से उठा देते हैं। लेकिन रविवार को जब सुबह जल्दी उठने की मजबूरी नहीं होती, तो शरीर ज्यादा देर तक सोकर इस कमी को पूरा करने की कोशिश करता है। इसलिए छुट्टी के दिन देर तक सोना कई बार आलस नहीं, बल्कि लगातार बनी हुई थकान का संकेत होता है।
कब चिंता की बात है
कभी-कभार व्यस्त सप्ताह के बाद रविवार को देर तक सोना सामान्य है। इससे परेशान होने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर हर सप्ताह ऐसा होने लगे और लंबी नींद लेने के बाद भी थकान बनी रहे, तो इस पर ध्यान देना जरूरी है।
कुछ लोगों को सुबह उठने के बाद भी शरीर भारी लगता है। दिनभर सुस्ती रहती है और किसी काम में मन नहीं लगता। कई बार काम के दौरान भी नींद आने लगती है। ये संकेत बताते हैं कि शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल रहा है।
अगर पर्याप्त समय सोने के बावजूद लगातार थकान महसूस होती है, तो इसकी वजह केवल नींद की कमी नहीं हो सकती। तनाव, अनियमित दिनचर्या और नींद से जुड़ी कुछ समस्याएं भी इसके पीछे हो सकती हैं। ऐसी स्थिति लंबे समय तक बनी रहे या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
वीकेंड पर नींद का संतुलन
रविवार को देर तक सोने की आदत से बचने के लिए सबसे पहले पूरे सप्ताह की दिनचर्या सुधारना जरूरी है। इसके लिए कुछ आसान बदलाव किए जा सकते हैं।
उठने का समय तय रखें: रविवार को भी रोजाना के समय से लगभग एक घंटे के भीतर उठने की कोशिश करें। इससे शरीर की जैविक घड़ी संतुलित रहती है।
शनिवार को जल्दी सोएं: छुट्टी की रात देर तक जागने से बचें। सोने और जागने का समय बहुत ज्यादा बदलने से सोमवार की सुबह परेशानी हो सकती है।
मोबाइल से दूरी बनाएं: सोने से पहले मोबाइल और टीवी का इस्तेमाल कम करें। इनकी रोशनी और लगातार मिलने वाली सूचनाएं नींद में देरी कर सकती हैं।
छोटी झपकी लें: दिन में ज्यादा नींद आए तो दोपहर में 20 से 30 मिनट की छोटी झपकी ले सकते हैं। शाम के समय लंबी नींद लेने से बचें।
धूप और सैर जरूरी: सुबह कुछ देर धूप में बिताएं और हल्की सैर करें। इससे शरीर की नींद-जागने की प्राकृतिक प्रक्रिया को नियमित रखने में मदद मिलती है।
रोज की आदत बदलना जरूरी
सबसे अच्छा उपाय है कि सोमवार से शनिवार तक भी पर्याप्त नींद ली जाए। अगर रोज समय पर सोने और उठने की आदत बना ली जाए, तो रविवार को दोपहर तक बिस्तर में पड़े रहने की जरूरत काफी हद तक कम हो सकती है।



















