लखनऊ क्राइम ब्रांच ने चारबाग रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों में यात्रियों की जेब काटने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। एडीसीपी क्राइम करण यादव के नेतृत्व में हुई कार्रवाई में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें महाराष्ट्र के अहमदनगर निवासी संदीप सुधाकर तिजोरे (35) को गिरोह का सरगना बताया गया है।
उसके साथ सोनभद्र के अरविंद गुप्ता, नासिक के कुणाल विलास सिरसाठ, मुंबई के जावेद अख्तर और गोंडा के सोनू जायसवाल को भी पकड़ा गया है। पुलिस ने इनके कब्जे से 1.24 लाख रुपये नकद और एक स्कूटर बरामद किया है। बरामद रकम को तीन चोरी की घटनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
टिकट लेकर स्टेशन में घुसते
गिरोह के सदस्य पुलिस से बचने के लिए पहले प्लेटफॉर्म टिकट खरीदते थे। इसके बाद स्टेशन के अंदर पहुंचकर भीड़ वाले इलाकों और ट्रेनों में यात्रियों पर नजर रखते थे। खासतौर पर सामान्य कोच इनके निशाने पर रहते थे।
आरोपी यात्रियों के बीच बैठ जाते और बातचीत या किसी दूसरी हरकत से उनका ध्यान भटकाते थे। इसी दौरान मौका मिलते ही जेब काट लेते। वारदात के बाद पकड़े जाने से बचने के लिए वे अगले स्टेशन पर ट्रेन से उतर जाते थे।
ट्रेन बदलकर लौटते थे
पुलिस पूछताछ में गिरोह के काम करने का अलग तरीका भी सामने आया। आरोपी जिस ट्रेन से वारदात करते, उससे अगले स्टेशन पर उतरने के बाद दूसरी ट्रेन पकड़कर लखनऊ लौट आते थे। इस तरह वे एक ही रास्ते से दोबारा लौटने से बचते थे।
आरोपी केवल यात्री बनकर ही नहीं, बल्कि ट्रेनों में पानी और गुटखा बेचने वाले वेंडर बनकर भी घूमते थे। शहर में आने-जाने के लिए ऑटो और ई-रिक्शा का इस्तेमाल करते थे, ताकि आम लोगों की तरह नजर आएं।
फ्लाइट से बदलते थे शहर
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं था। इसके सदस्य उत्तर प्रदेश के अलावा मुंबई, नासिक, दिल्ली और अहमदनगर में भी सक्रिय रहे हैं। बड़ी बात यह सामने आई कि ये लोग वारदात के लिए कई शहरों के बीच फ्लाइट से भी सफर करते थे।
महंगे किराये के मकानों में रहकर सामान्य से ज्यादा खर्च वाली जिंदगी जीते थे। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि पांचों मिलकर जेब काटने से एक महीने में करीब 20 लाख रुपये तक कमा लेते थे।
सरगना पर पहले से केस
गिरोह के सरगना संदीप सुधाकर तिजोरे का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है। उसके खिलाफ मुंबई में वर्ष 2009 से चोरी के मामले दर्ज बताए गए हैं। वहीं जावेद अख्तर की भूमिका गिरोह में नए सदस्यों को जोड़ने की थी।
पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ के आधार पर दूसरे शहरों में की गई वारदातों की जानकारी जुटा रही है। महाराष्ट्र, दिल्ली और दूसरे राज्यों की पुलिस से भी संपर्क किया गया है, ताकि वहां हुई चोरी की घटनाओं में इस गिरोह की भूमिका की पहचान हो सके।
पीड़ितों से संपर्क की अपील
लखनऊ पुलिस ने दूसरे राज्यों की पुलिस से अपील की है कि अगर किसी चोरी के मामले में पीड़ित इन आरोपियों को पहचानते हैं तो पुलिस से संपर्क करें। आरोपियों के पास से बरामद रकम या कोई चोरी का सामान किसी मामले से जुड़ा मिलता है, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे संबंधित पीड़ित को वापस किया जाएगा।
