King George’s Medical University के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग ने एक बार फिर अपनी विशेषज्ञता का शानदार प्रदर्शन करते हुए एक मासूम बच्चे को नई जिंदगी दी है। विभाग के डॉक्टरों ने महज 10 किलोग्राम वजन के एक छोटे बच्चे के शरीर से करीब डेढ़ किलोग्राम वजनी विशाल ट्यूमर सफलतापूर्वक निकालने में सफलता हासिल की। यह सर्जरी बेहद जटिल और जोखिम भरी मानी जा रही थी, क्योंकि बच्चे के कुल वजन का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ ट्यूमर का था।
इतनी छोटी उम्र में इतनी बड़ी चुनौती
डॉक्टरों के मुताबिक, इतनी कम उम्र और कम वजन के बच्चे में इतने बड़े ट्यूमर का ऑपरेशन करना किसी चुनौती से कम नहीं था। सर्जरी के दौरान हर एक कदम बेहद सावधानी और सटीकता के साथ उठाना पड़ा, क्योंकि जरा सी चूक बच्चे की जान के लिए खतरा बन सकती थी।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने संभाली कमान
इस जटिल ऑपरेशन का नेतृत्व प्रोफेसर डॉ. जेडी रावत ने किया। उनकी अगुवाई में सीनियर रेजिडेंट डॉ. श्रेया श्रीवास्तव, डॉ. मानिष राजपूत और अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने कई घंटों तक चले ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा किया। ऑपरेशन थिएटर में नर्सिंग स्टाफ की भूमिका भी अहम रही। सहायक नर्सिंग सुपरिटेंडेंट सुधा सिंह सहित पूरी टीम ने इस चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
समय पर इलाज से टला बड़ा खतरा
डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे के शरीर में मौजूद यह ट्यूमर तेजी से बढ़ रहा था और अगर समय रहते इसका ऑपरेशन नहीं किया जाता, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। सर्जरी के बाद बच्चे को निगरानी में रखा गया, जहां उसकी हालत में लगातार सुधार देखा जा रहा है। फिलहाल बच्चा खतरे से बाहर है और रिकवरी अच्छी हो रही है।
परिवार ने जताया आभार, केजीएमयू ने सराहा प्रयास
बच्चे की मां ने डॉक्टरों की पूरी टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके बेटे को नई जिंदगी मिली है। परिवार के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। केजीएमयू प्रशासन ने भी इस उपलब्धि पर पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की सराहना की है और इसे संस्थान के लिए गर्व का क्षण बताया है। यह सफलता एक बार फिर साबित करती है कि केजीएमयू के डॉक्टर कठिन से कठिन सर्जरी को भी सफलतापूर्वक अंजाम देने में सक्षम हैं।
