दीपावली से पहले ही उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। शहर के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 200 के पार पहुंच गया है। इससे लोगों की स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ने लगी हैं। बुधवार को केंद्रीय विद्यालय अलीगंज में सबसे अधिक 277 एक्यूआई दर्ज किया गया। वहीं, तालकटोरा औद्योगिक क्षेत्र में एक्यूआई 257 और लालबाग में 219 रिकॉर्ड किया गया।
बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय के आसपास भी हवा की गुणवत्ता खराब बनी हुई है। यहां एक्यूआई 212 दर्ज किया गया। इसके अलावा गोमती नगर में 198 और कुकरैल पिकनिक स्पॉट में 161 एक्यूआई रहा। मौसम में बदलाव और हवा की रफ्तार कम होने के कारण प्रदूषक वातावरण में जमा हो रहे हैं। ऐसे में दीपावली पर पटाखों की आतिशबाजी के बाद प्रदूषण का स्तर और बढ़ने की आशंका है।
वायु प्रदूषण के साथ ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ा
लखनऊ में केवल वायु प्रदूषण ही नहीं, बल्कि ध्वनि प्रदूषण भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। शहर के प्रमुख चौराहों, व्यस्त सड़कों, बाजारों और आवासीय इलाकों में वाहनों के हॉर्न, ट्रैफिक और निर्माण कार्यों के कारण शोर बढ़ रहा है।
सबसे अधिक ध्वनि प्रदूषण चारबाग क्षेत्र में दर्ज किया गया है। रेलवे स्टेशन और बस अड्डे के नजदीक होने के कारण यहां दिन में शोर का औसत स्तर 89.7 डेसिबल और रात में 87.4 डेसिबल तक पहुंच जाता है। वहीं, गोमती नगर में रात के समय 76.7 डेसिबल और इंदिरा नगर में दिन के समय 73.7 डेसिबल शोर दर्ज किया गया।
पीएम 2.5 और पीएम 10 के कण स्वास्थ्य के लिए खतरनाक
लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के कार्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर भुवन चंद्र तिवारी के मुताबिक, हवा में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 के महीन कण स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदायक होते हैं। खासकर पीएम 2.5 के कण इतने छोटे होते हैं कि सांस के जरिए फेफड़ों के अंदर तक पहुंच सकते हैं।
लगातार प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से खांसी, गले में खराश, आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसका अधिक असर अस्थमा और हृदय रोग से पीड़ित मरीजों के साथ गर्भवती महिलाओं पर पड़ सकता है।
पटाखों के धुएं से कई दिनों तक रह सकता है प्रदूषण
दीपावली के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं और रासायनिक तत्व हवा में महीन प्रदूषक कणों की मात्रा बढ़ा देते हैं। यदि इस दौरान हवा की रफ्तार कम रहती है, तो प्रदूषकों का फैलाव नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में प्रदूषण का असर कई दिनों तक बना रह सकता है।
यही वजह है कि दीपावली के बाद राजधानी में वायु गुणवत्ता और खराब होने की आशंका जताई जा रही है।
प्रदूषण रोकने के लिए एजेंसियों को उठाने होंगे कदम
प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी एजेंसियों को प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। प्रमुख सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर धूल को नियंत्रित करना और खुले में कूड़ा जलाने पर रोक लगाना जरूरी है।
इसके अलावा यातायात के दबाव वाले क्षेत्रों में भी प्रदूषण कम करने के उपाय करने होंगे। प्रशासन की ओर से खुले में कूड़ा जलाने और सड़क की धूल से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। हालांकि, कूड़ा जलाना भी राजधानी में वायु प्रदूषण बढ़ने की प्रमुख वजहों में शामिल है।
बुधवार को लखनऊ के प्रमुख इलाकों का AQI
|क्षेत्र एक्यूआई
| केंद्रीय विद्यालय अलीगंज | 277 |
| तालकटोरा औद्योगिक क्षेत्र | 257 |
| लालबाग | 219 |
| बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय | 212 |
| गोमती नगर | 198 |
| कुकरैल पिकनिक स्पॉट | 161 |
ध्वनि प्रदूषण के निर्धारित मानक:
आवासीय क्षेत्र: दिन में 55 और रात में 45 डेसिबल।
व्यावसायिक क्षेत्र: दिन में 65 और रात में 55 डेसिबल।
शांत क्षेत्र (अस्पताल और शिक्षण संस्थान): दिन में 50 और रात में 40 डेसिबल।
ऐसे में दीपावली से पहले राजधानी में वायु और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

