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Mahakumbh 2025 : महाकुंभ के साथ करें प्रयागराज की इन 5 ऐतिहासिक धरोहरों के दर्शन, अपनी यात्रा को बनाएं यादगार

Mahakumbh 2025 : प्रयागराज में 13 जनवरी 2025 से महाकुंभ की भव्य शुरुआत होने जा रही है, जो 26 फरवरी तक चलेगा। इस 54 दिन लंबे आयोजन में करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। यदि आप भी इस दिव्य महाकुंभ में शामिल होने की योजना बना रहे हैं, तो संगम में पवित्र डुबकी और प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन के बाद, प्रयागराज की ऐतिहासिक इमारतों की सैर जरूर करें।प्रयागराज न केवल गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां की ऐतिहासिक धरोहरें भी अद्वितीय हैं। आइए जानते हैं उन खास जगहों के बारे में, जो आपके महाकुंभ अनुभव को और भी यादगार बना सकती हैं।

1. इलाहाबाद किला

मुगल सम्राट अकबर द्वारा 1583 में निर्मित यह किला संगम क्षेत्र के समीप स्थित है। इसके भीतर अक्षय वट और भूमिगत मंदिर जैसे ऐतिहासिक स्थल भी हैं। संगम में स्नान और लेटे हनुमान जी के दर्शन के बाद इस किले की भव्यता का अनुभव करना न भूलें।

2. खुसरो बाग

प्रयागराज जंक्शन के नजदीक स्थित खुसरो बाग मुगलकालीन स्थापत्य का उत्कृष्ट नमूना है। यहां मुगल शहजादा खुसरो, उनकी बहन और उनकी मां के मकबरे मौजूद हैं। खुसरो बाग में इलाहाबाद के प्रसिद्ध अमरूद के पेड़ भी हैं। महाकुंभ के दौरान यह बाग आपकी यात्रा का एक शांत और सुंदर पड़ाव बन सकता है।

3. भारद्वाज आश्रम

त्रेतायुग में भगवान राम, देवी सीता और लक्ष्मण जी ने वनवास के दौरान इस पवित्र आश्रम में विश्राम किया था। बालसन इलाके में स्थित इस ऐतिहासिक स्थल का दर्शन करके आप अपने महाकुंभ अनुभव को आध्यात्मिक दृष्टि से समृद्ध बना सकते हैं।

4. आजाद पार्क

क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की वीरगाथा को समर्पित यह पार्क प्रयागराज का गौरव है। यहीं पर आजाद ने आखिरी गोली खुद को मारकर अपने प्राणों की आहुति दी थी। पहले इसे अल्फ्रेड पार्क के नाम से जाना जाता था। इस पार्क में विक्टोरिया मेमोरियल भी है, जो अंग्रेजों की स्थापत्य कला का उदाहरण है।

5. इलाहाबाद संग्रहालय

यह संग्रहालय प्राचीन भारतीय इतिहास और संस्कृति का खजाना है। यहां आपको पहली शताब्दी से संबंधित मूर्तियां और अवशेष देखने को मिलेंगे। इसमें चंद्रशेखर आजाद की पिस्तौल और विभाजन के समय मिली दुर्लभ वस्तुएं भी संरक्षित हैं। साथ ही, आनंद भवन, जो नेहरू परिवार का निवास स्थान था, भी देखने लायक है। महाकुंभ के इस पावन अवसर पर संगम में डुबकी लगाने के साथ-साथ इन ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा करना एक अद्वितीय अनुभव होगा।

 

 

 

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