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Hiring Policy : क्यों और कौन से चार राज्यों के पुरुषों को नौकरी नहीं देगी कंपनी, CEO ने बताई अजीब वजह

A1 Sports World Hiring Policy: बेंगलुरु की कंपनी A1 Sports World की एक हायरिंग पॉलिसी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। कंपनी के फाउंडर और CEO कार्तिक एसजी ने 22 सितंबर को X पर पोस्ट कर कहा कि उनकी कंपनी अब उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश से आने वाले पुरुष उम्मीदवारों को नौकरी नहीं देगी।

कार्तिक ने अपने फैसले की वजह एक पूर्व कर्मचारी से जुड़ी कथित घटना को बताया। उनके मुताबिक, कंपनी में काम करने वाले एक कर्मचारी को महिला स्टाफ के साथ कथित गलत व्यवहार को लेकर पहले चेतावनी दी गई थी। बाद में उसे नौकरी से निकाल दिया गया।

चार राज्यों पर रोक

CEO की पोस्ट के मुताबिक, नई नीति के तहत इन चार राज्यों से आने वाले पुरुष उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा। कंपनी में फिलहाल 32 कर्मचारी हैं, जिनमें 14 महिलाएं हैं।

कार्तिक का कहना है कि उनकी कंपनी बच्चों से जुड़े स्पोर्ट्स प्रोग्राम भी चलाती है। इसलिए कर्मचारियों और खासकर बच्चों की सुरक्षा को लेकर वह अतिरिक्त सावधानी बरतना चाहते हैं।

हालांकि, इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे कि किसी कर्मचारी से जुड़ी कथित घटना के आधार पर पूरे राज्यों से आने वाले पुरुष उम्मीदवारों को भर्ती से बाहर करना कितना उचित है।

कर्मचारी पर गंभीर आरोप

CEO ने बाद की पोस्ट में दावा किया कि करीब दो हफ्ते पहले कंपनी ने एक कर्मचारी को नौकरी से निकाला था। उनके अनुसार, महिला कर्मचारियों के साथ कथित गलत व्यवहार को लेकर उसे पहले दो बार चेतावनी दी गई थी।

कार्तिक ने यह भी आरोप लगाया कि इसके बावजूद एक महिला कर्मचारी के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पूरी पुष्टि नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि कर्मचारी की भर्ती के समय उसका रिज्यूमे और बैकग्राउंड चेक सामान्य था। घटना के बाद कंपनी ने अपनी भर्ती नीति में बदलाव करने का फैसला किया।

सोशल मीडिया पर बहस

कंपनी की नीति सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने इसे क्षेत्रीय भेदभाव से जोड़ते हुए आलोचना की। उनका कहना था कि किसी व्यक्ति की योग्यता और व्यवहार को उसके राज्य के आधार पर तय नहीं किया जाना चाहिए।

वहीं कुछ लोगों ने कंपनी की सुरक्षा संबंधी चिंता का समर्थन किया। उनका तर्क था कि बच्चों के साथ काम करने वाली संस्था को कर्मचारियों की पृष्ठभूमि और व्यवहार को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने का अधिकार होना चाहिए।

CEO ने अपना पक्ष रखा

कार्तिक ने आलोचना के जवाब में कहा कि कंपनी समान अवसर में विश्वास करती है। उन्होंने बताया कि कंपनी के 32 कर्मचारियों में 20 दूसरे राज्यों से हैं, जिनमें 12 दक्षिण भारत के बाहर के राज्यों से आते हैं।

CEO के मुताबिक, उनके पोस्ट के बाद सबसे ज्यादा प्रतिक्रियाएं बिहार से आईं। उन्होंने कहा कि वह अपने राज्य की समस्याओं से भी इनकार नहीं करते और गलतियों को स्वीकार कर उन्हें सुधारने की कोशिश होनी चाहिए।

सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

मामले में मुख्य बहस अब दो अलग मुद्दों पर केंद्रित है। एक तरफ कंपनी के सामने कार्यस्थल और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है। दूसरी तरफ किसी एक कर्मचारी के कथित व्यवहार को उसके राज्य से जुड़े सभी पुरुष उम्मीदवारों पर लागू करने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

कार्तिक ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि कंपनी चलाने से जुड़े फैसले लेने का अधिकार उनके पास है। वहीं आलोचना करने वाले यूजर्स का कहना है कि भर्ती में व्यक्तिगत योग्यता, अनुभव और उम्मीदवार की जांच को आधार बनाया जाना चाहिए।

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