Anil Agarwal Mourns Son Agnivesh Death:वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के जीवन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके बेटे अग्निवेश अग्रवाल का निधन हो गया है। यह खबर सामने आते ही उद्योग जगत और सोशल मीडिया पर शोक की लहर दौड़ गई। अनिल अग्रवाल ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बेहद भावुक पोस्ट के जरिए इस दुखद समाचार को साझा किया।
उन्होंने बताया कि अग्निवेश अमेरिका में स्कीइंग के दौरान हुए एक हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद उन्हें न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा था। परिवार को पूरी उम्मीद थी कि वे जल्द स्वस्थ होकर घर लौट आएंगे। डॉक्टरों से भी सकारात्मक संकेत मिल रहे थे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
सोशल मीडिया पर छलका पिता का दर्द
अनिल अग्रवाल ने अपनी पोस्ट में लिखा कि यह उनके जीवन का सबसे काला दिन है। उन्होंने कहा कि उनके प्यारे बेटे अग्निवेश उन्हें बहुत कम उम्र में छोड़कर चले गए। वे सिर्फ 49 वर्ष के थे, पूरी तरह स्वस्थ, जोश से भरे और भविष्य के कई सपने संजोए हुए थे। स्कीइंग दुर्घटना के बाद उनकी हालत में सुधार हो रहा था और परिवार को लग रहा था कि मुश्किल समय बीत चुका है।
लेकिन अचानक दिल का दौरा पड़ने से अग्निवेश का निधन हो गया। अनिल अग्रवाल ने लिखा कि एक माता-पिता के लिए अपने बच्चे को खोने का दर्द शब्दों में बयान करना नामुमकिन है। उन्होंने कहा कि एक बेटे को अपने पिता से पहले नहीं जाना चाहिए। इस घटना ने पूरे परिवार को अंदर से तोड़ दिया है।
बेटे की जिंदगी और संघर्ष
अनिल अग्रवाल ने पोस्ट में बेटे के जन्म और जीवन को भी याद किया। उन्होंने लिखा कि अग्निवेश का जन्म 3 जून 1976 को पटना में हुआ था। एक मध्यमवर्गीय बिहारी परिवार में पले-बढ़े अग्निवेश मजबूत इरादों, दयालु स्वभाव और स्पष्ट उद्देश्य वाले इंसान थे। वे अपनी मां के जीवन की रोशनी, अपने भाई के रक्षक और दोस्तों के सच्चे साथी थे।
अग्निवेश ने अजमेर के मेयो कॉलेज से पढ़ाई की और आगे चलकर फुजैराह गोल्ड जैसी बड़ी कंपनी की स्थापना की। वे हिंदुस्तान जिंक के चेयरमैन भी बने। अपनी उपलब्धियों के बावजूद वे हमेशा सादगी, प्रेम और इंसानियत से जुड़े रहे।
समाज के लिए बड़े सपने
अनिल अग्रवाल ने लिखा कि अग्निवेश आत्मनिर्भर भारत के मजबूत समर्थक थे। वे अक्सर कहते थे कि भारत में किसी चीज की कमी नहीं है, फिर हम पीछे क्यों रहें। पिता और बेटे का सपना था कि कोई बच्चा भूखा न सोए, हर बच्चे को शिक्षा मिले, महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और युवाओं को सार्थक रोजगार मिले।
उन्होंने यह भी दोहराया कि उन्होंने अपने बेटे से वादा किया था कि उनकी कमाई का 75 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा समाज को लौटाया जाएगा। इस वादे को निभाने का संकल्प उन्होंने फिर दोहराया।
हमेशा जिंदा रहेंगे यादों में
पोस्ट के अंत में अनिल अग्रवाल ने लिखा कि अग्निवेश हमेशा उनके दिलों, उनके काम और उन सभी लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे जिन्हें उन्होंने छुआ। बेटे के बिना आगे का सफर कठिन है, लेकिन वे उसकी रोशनी को आगे बढ़ाने की कोशिश करते रहेंगे।
