Major Survey: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने संगठन और मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन का बड़ा आंतरिक सर्वे कराया है। रिपोर्टों के अनुसार कई सीटों पर एंटी-इनकंबेंसी, कमजोर जनसंपर्क और संगठन से दूरी जैसी शिकायतें सामने आई हैं। इसी वजह से बड़ी संख्या में मौजूदा विधायकों के टिकट पर खतरा मंडराने की चर्चा तेज हो गई है। हालिया रिपोर्टों में भी संकेत मिले हैं कि लगभग 35 से 40 प्रतिशत विधायकों के टिकट बदले जा सकते हैं।
बहुमत की राह आसान नहीं
बताया जा रहा है कि पार्टी का आकलन है कि 2022 जैसी आसान स्थिति इस बार नहीं होगी। कई क्षेत्रों में कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है, इसलिए संगठन बूथ स्तर तक रणनीति मजबूत करने में जुट गया है। भाजपा पहले ही हारी हुई सीटों पर विशेष अभियान, लाभार्थी संपर्क और बूथ प्रबंधन पर फोकस बढ़ा चुकी है ताकि चुनाव से पहले कमजोर इलाकों में पकड़ मजबूत की जा सके।
सहयोगी दलों की भी बढ़ी टेंशन
अगर बड़े पैमाने पर टिकट बदले जाते हैं तो इसका असर सिर्फ भाजपा पर ही नहीं बल्कि उसके सहयोगी दलों पर भी पड़ सकता है। सीट बंटवारे के दौरान सहयोगियों की दावेदारी और स्थानीय नेताओं की नाराजगी जैसे मुद्दे सामने आ सकते हैं। ऐसे में गठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखना पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
संगठन को मिलेगा नया संदेश
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि टिकट बदलने का फैसला केवल जीत की संभावना बढ़ाने के लिए नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और जनता के बीच नया संदेश देने की रणनीति भी हो सकता है। पार्टी नेतृत्व प्रदर्शन के आधार पर उम्मीदवार तय करने की नीति पर जोर देता रहा है। हालांकि अंतिम फैसला चुनाव के करीब राजनीतिक परिस्थितियों और ताजा फीडबैक के आधार पर ही लिया जाएगा।
2027 की तैयारी तेज
उत्तर प्रदेश का 2027 चुनाव भाजपा, समाजवादी पार्टी और अन्य दलों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इसी वजह से सभी दल अपने-अपने स्तर पर संगठन मजबूत करने, नए सामाजिक समीकरण बनाने और उम्मीदवारों के चयन की तैयारी में जुटे हैं। भाजपा का यह आंतरिक सर्वे भी उसी व्यापक चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य समय रहते कमजोरियों को दूर करना है।
