भारत के ऑटोमोबाइल बाजार में ग्राहकों की पसंद तेजी से बदल रही है। जुलाई 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी घटकर 41.68 फीसदी रह गई। वहीं CNG, इलेक्ट्रिक और अन्य वैकल्पिक ईंधन वाली कारों की संयुक्त हिस्सेदारी 40.59 फीसदी पहुंच गई। दोनों के बीच अंतर अब करीब 1.1 फीसदी रह गया है, जबकि कुछ समय पहले यह लगभग 13 फीसदी था। डीलर्स का मानना है कि मौजूदा ट्रेंड जारी रहा तो वैकल्पिक ईंधन वाली कारें जल्द पेट्रोल वाहनों से आगे निकल सकती हैं।
E20 को लेकर चिंता
बाजार में हो रहे इस बदलाव के पीछे E20 पेट्रोल को लेकर ग्राहकों की आशंकाओं को भी एक वजह माना जा रहा है। कुछ खरीदारों को चिंता है कि 20 फीसदी एथेनॉल मिले पेट्रोल से माइलेज कम हो सकता है और पुरानी कारों पर इसका असर पड़ सकता है। भविष्य में एथेनॉल की मात्रा बढ़ने की चर्चाओं ने भी इस चिंता को बढ़ाया है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल कारों की घटती हिस्सेदारी के लिए केवल E20 को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। ईंधन की कीमत, SUV की लोकप्रियता और कार चलाने की कुल लागत भी खरीदारी के फैसले को प्रभावित कर रही है।
डीलर्स पर स्टॉक दबाव
ग्राहकों की बदलती पसंद का असर डीलरशिप के स्टॉक पर भी दिखाई दे रहा है। FADA के आंकड़ों के अनुसार, 25 फीसदी से ज्यादा डीलर्स के पास 60 से 70 दिन या उससे पुराना स्टॉक मौजूद है। सामान्य इन्वेंट्री चक्र करीब 30 से 33 दिन का माना जाता है। जुलाई में कंपनियों ने डीलर्स को करीब 4.69 लाख वाहन भेजे, जबकि रिटेल बिक्री लगभग 4.16 लाख यूनिट रही। करीब 52 हजार वाहनों के इस अंतर को कम करने के लिए पेट्रोल मॉडल्स पर भारी डिस्काउंट दिए जा रहे हैं।
डीजल की फिर मांग
पेट्रोल कारों की मांग कमजोर होने के बीच डीजल वाहनों की बिक्री में दोबारा मजबूती दिख रही है। जुलाई में डीजल वाहनों की हिस्सेदारी करीब 17.73 फीसदी रही। SUV की बढ़ती मांग, बेहतर टॉर्क और लंबी दूरी पर कम रनिंग कॉस्ट की वजह से डीजल मॉडल ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। E20 को लेकर बनी अनिश्चितता भी कुछ खरीदारों को डीजल की ओर ले जा रही है। टाटा मोटर्स के मुताबिक, करीब 15 लाख रुपये तक की कीमत वाली डीजल SUVs को बाजार में अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।
E20 पर सियासी बहस
E20 नीति अब राजनीतिक बहस का मुद्दा भी बन चुकी है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पेट्रोल कारों की घटती हिस्सेदारी का हवाला देते हुए केंद्र से एथेनॉल नीति पर दोबारा विचार करने की मांग की है। ‘आप’ पहले भी E20 के साथ E10 और E0 पेट्रोल उपलब्ध कराने की मांग कर चुकी है। दूसरी ओर, पेट्रोलियम मंत्रालय ने नीति का बचाव करते हुए कहा है कि E20 को ऑटो कंपनियों के साथ विचार-विमर्श और परीक्षण के बाद लागू किया गया। सरकार के अनुसार इससे कच्चे तेल के आयात, प्रदूषण और विदेशी मुद्रा खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है, साथ ही किसानों की आय बढ़ाने में भी फायदा होगा। मंत्रालय का कहना है कि E20 से इंजन खराब होने का कोई पुख्ता प्रमाण सामने नहीं आया है।
