Impact on Monsoon 2026: मॉनसून पर मंडरा रहा खतरा, क्या एल नीनो से कम होगी बारिश, कई राज्यों में बनेंगे सूखे जैसे हालात

मॉनसून 2026 में एल नीनो के कारण बारिश कम होने की आशंका है। इससे खेती और अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। कई राज्यों में सूखे जैसे हालात बनने का खतरा भी बढ़ गया है।

El Nino Impact on Monsoon 2026: दुनिया में हाल ही में भू-राजनीतिक तनाव कम होने से तेल और गैस की कीमतों में राहत की उम्मीद जगी है। लेकिन भारत के लिए एक नई चिंता सामने आ गई है। इस बार मॉनसून 2026 को लेकर जो संकेत मिल रहे हैं, वे चिंता बढ़ाने वाले हैं। अनुमान है कि देश में बारिश सामान्य से कम हो सकती है, जिससे करीब 40 करोड़ किसानों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।

बारिश का अनुमान कम

एक निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट के अनुसार, इस साल देश में कुल बारिश सामान्य के मुकाबले कम रहने की संभावना है। आंकड़ों के मुताबिक, जून से सितंबर के बीच होने वाली कुल बारिश लंबी अवधि के औसत का करीब 94 फीसदी रह सकती है। यानी जहां औसतन 868.6 मिलीमीटर बारिश होती है, वहां इस बार करीब 816 मिलीमीटर बारिश होने का अनुमान है।

सूखे का खतरा बढ़ा

स्काईमेट ने यह भी कहा है कि 40 प्रतिशत संभावना है कि बारिश 90 से 95 प्रतिशत के बीच रहेगी। वहीं, 30 प्रतिशत संभावना ऐसी भी है कि बारिश 90 प्रतिशत से भी कम हो सकती है। इस स्थिति में कई इलाकों में सूखे जैसे हालात बन सकते हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि सामान्य या ज्यादा बारिश की संभावना बहुत कम बताई गई है।

एल नीनो बनेगा बड़ा कारण

इस पूरे अनुमान के पीछे सबसे बड़ा कारण एल नीनो को माना जा रहा है। यह एक ऐसी जलवायु स्थिति है, जो मॉनसून को कमजोर कर देती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जून के बाद एल नीनो का असर तेजी से बढ़ेगा। इससे खासकर अगस्त और सितंबर में बारिश कम हो सकती है।

महीनों के हिसाब से अनुमान

अनुमान के अनुसार, जून में बारिश सामान्य से थोड़ी बेहतर यानी 101 प्रतिशत तक रह सकती है। जुलाई में यह 95 प्रतिशत, अगस्त में 92 प्रतिशत और सितंबर में 89 प्रतिशत तक गिर सकती है। इसका मतलब है कि मॉनसून की शुरुआत ठीक रहेगी, लेकिन बाद के महीनों में स्थिति बिगड़ सकती है।

किन राज्यों पर पड़ेगा ज्यादा असर

बारिश का असर पूरे देश में एक जैसा नहीं रहेगा। पूर्वी भारत के राज्यों जैसे बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में अच्छी बारिश हो सकती है। वहीं, उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश कम रहने की आशंका है, जिससे खेती पर सीधा असर पड़ेगा।

अर्थव्यवस्था पर असर

भारत की अर्थव्यवस्था काफी हद तक मॉनसून पर निर्भर करती है। करीब 51 प्रतिशत खेती और 40 प्रतिशत उत्पादन बारिश पर आधारित है। अगर बारिश कम होती है, तो ग्रामीण इलाकों में मांग घट सकती है और खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

सावधानी और तैयारी जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समय सावधान रहने का है। किसानों को फसल की योजना सोच-समझकर बनानी चाहिए और सरकार को भी जरूरी कदम उठाने होंगे।
कुल मिलाकर, मॉनसून 2026 की शुरुआत भले ही ठीक रहे, लेकिन आगे चलकर एल नीनो का असर परेशानी बढ़ा सकता है। यह स्थिति सभी के लिए सतर्क रहने का संकेत है।

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