EPFO EEC Scheme Benefits: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की इंप्लॉय एनरोलमेंट स्कीम (EEC) उन कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आई है, जो लंबे समय तक किसी संस्थान में काम करने के बावजूद पीएफ सुविधा से वंचित रहे। इस स्कीम के तहत अगर कर्मचारी का पिछली सेवा अवधि का पीएफ अंशदान जमा नहीं हुआ है, तब भी उसे योजना का लाभ मिल सकता है। शर्त सिर्फ इतनी है कि नियोक्ता अपने हिस्से का बकाया अंशदान जमा करा दे।
ईपीएफओ इस योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इसके तहत नए और पुराने, दोनों तरह के कर्मचारियों का नामांकन कराया जा रहा है। विभिन्न संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों को पीएफ और पेंशन योजनाओं से जोड़ने के लिए विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं।
एक दिन का अंशदान भी बना सकता है पेंशन का हकदार
कानपुर के क्षेत्रीय पीएफ कमिश्नर शाहिद इकबाल ने बताया कि अगर कोई कर्मचारी वर्षों तक किसी संस्थान में काम करता रहा है, लेकिन उसे पीएफ का लाभ नहीं मिला, तो भी ईईसी स्कीम के तहत नामांकन के बाद स्थिति बदल सकती है। अगर नामांकन के बाद कर्मचारी का एक दिन भी पीएफ अंशदान कट गया और उसी दौरान उसकी मृत्यु हो गई, तो उसके परिवार को पारिवारिक पेंशन का लाभ मिलेगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईईसी नामांकन का लाभ अप्रैल तक ही मिलेगा। इसलिए सभी संस्थानों को चाहिए कि वे अपने नए और पुराने कर्मचारियों का नामांकन समय रहते पूरा कर लें।
कर्मचारी की मौत पर परिवार को कैसे मिलती है पेंशन
ईपीएफओ से जुड़े किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर उसके परिवार को कर्मचारी पेंशन योजना 1995 (EPS-95) के तहत पारिवारिक पेंशन दी जाती है। यह पेंशन एक साथ सभी को नहीं, बल्कि तय क्रम के अनुसार मिलती है।
सबसे पहले मृत कर्मचारी की पत्नी या पति को पेंशन दी जाती है। यह पेंशन आजीवन या दोबारा शादी होने तक मिलती है। इसके बाद अधिकतम दो बच्चों को 25 वर्ष की उम्र तक पेंशन दी जाती है। बेटी के मामले में यह लाभ उसकी शादी तक मिलता है। यदि माता-पिता दोनों की मृत्यु हो चुकी हो, तो बच्चों को अनाथ पेंशन दी जाती है, जो सामान्य बाल पेंशन से दोगुनी होती है। अगर पत्नी, पति या बच्चे नहीं हैं, तो यह पेंशन माता-पिता को दी जाती है।
कितनी मिलती है पारिवारिक पेंशन
पेंशन की राशि कर्मचारी के अंतिम वेतन और कुल सेवा अवधि पर निर्भर करती है। फिलहाल पारिवारिक पेंशन की न्यूनतम राशि एक हजार रुपये प्रति माह तय है। आमतौर पर यह ढाई हजार से लेकर साढ़े सात हजार रुपये प्रतिमाह तक होती है। बच्चों को मिलने वाली पेंशन, विधवा या विधुर पेंशन का 25 प्रतिशत प्रति बच्चा होती है। पेंशन कर्मचारी की मृत्यु के अगले दिन से लागू मानी जाती है।
औद्योगिक क्षेत्रों में लगाए जा रहे कैंप
ईपीएफओ यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि हर कर्मचारी को पीएफ और पेंशन का लाभ मिले। इसके लिए औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार जागरूकता कैंप लगाए जा रहे हैं। दादानगर, पनकी, रूमा, सचेंडी और जाजमऊ जैसे इलाकों में नियोक्ताओं और कर्मचारियों को योजना की पूरी जानकारी दी जा रही है।
ये फॉर्म भरना है जरूरी
पेंशन पाने के लिए फॉर्म-10D भरना अनिवार्य है। इसके अलावा पीएफ राशि के लिए फॉर्म-20 और ईडीएलआई बीमा लाभ के लिए फॉर्म-5IF जमा करना होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईपीएफओ रिकॉर्ड में परिवार और नॉमिनी की जानकारी पहले से अपडेट रहने पर लाभ मिलने में देरी नहीं होती।


