Caste Census Begins: देश में आजादी के बाद पहली बार जातिगत जनगणना का दूसरा चरण 17 अगस्त 2026 से शुरू होने जा रहा है। इस चरण में नागरिकों की जाति के साथ कई नई जानकारियां भी दर्ज की जाएंगी। केंद्र सरकार ने इसके लिए विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है। जनगणना पूरी तरह डिजिटल प्रणाली से कराई जाएगी और लोगों को स्व-गणना (Self Enumeration) का विकल्प भी मिलेगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य देश की सामाजिक और जनसंख्या संबंधी जानकारी को अधिक सटीक और व्यापक बनाना है।
क्या-क्या पूछा जाएगा
इस बार जनगणना के दौरान लोगों से उनकी जाति के अलावा माता और पिता की जन्मतिथि तथा जन्मस्थान की जानकारी भी ली जाएगी। यदि किसी व्यक्ति को जन्म की सटीक तारीख याद नहीं है तो केवल जन्म वर्ष बताने पर भी जानकारी दर्ज की जा सकेगी। नागरिक चाहें तो स्वेच्छा से अपना आधार नंबर और पासपोर्ट संबंधी जानकारी भी साझा कर सकते हैं। खास बात यह है कि जाति दर्ज कराने के लिए किसी प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं होगी। व्यक्ति जो जाति बताएगा, उसे उसी रूप में रिकॉर्ड किया जाएगा।
यह रहेगा पूरा शेड्यूल
गृह मंत्रालय के कार्यक्रम के अनुसार, सबसे पहले लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ प्रभावित क्षेत्रों में 17 से 31 अगस्त तक स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इसके बाद 1 से 30 सितंबर तक इन क्षेत्रों में घर-घर जाकर जनगणना होगी। 1 से 5 अक्टूबर तक पुनरीक्षण (Revision) का कार्य किया जाएगा। इन इलाकों के लिए 1 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि को संदर्भ तिथि माना जाएगा। अन्य राज्यों के लिए अलग कार्यक्रम जारी किया जाएगा।
डिजिटल होगी पूरी प्रक्रिया
सरकार ने इस बार जनगणना को पूरी तरह आधुनिक तकनीक से जोड़ने की तैयारी की है। अधिकारियों के अनुसार, 2011 की सामाजिक-आर्थिक जातिगत गणना में हजारों अलग-अलग जातियों के नाम दर्ज होने से डेटा विश्लेषण कठिन हो गया था। इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल टूल्स की मदद से डेटा का वर्गीकरण और विश्लेषण किया जाएगा। इससे जानकारी अधिक व्यवस्थित और उपयोगी बनने की उम्मीद है।
नीतियों में मिलेगी मदद
विशेषज्ञों का मानना है कि जातिगत जनगणना से सरकार को विभिन्न समुदायों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का स्पष्ट आंकड़ा मिलेगा। इससे शिक्षा, रोजगार, कल्याणकारी योजनाओं और संसाधनों के बेहतर वितरण में मदद मिल सकती है। यह पहली बार होगा जब आजादी के बाद पूरे देश में आधिकारिक जनगणना के दौरान जाति संबंधी जानकारी व्यापक स्तर पर दर्ज की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया से भविष्य की नीतियां अधिक तथ्य आधारित बनाई जा सकेंगी।
