Code on Wages: नौकरी बदलना या किसी कारण से काम छोड़ना हर नौकरीपेशा व्यक्ति के करियर का सामान्य हिस्सा होता है। लेकिन अब तक कर्मचारियों को अपनी ही मेहनत की कमाई पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। कई कंपनियों में फुल एंड फाइनल (FnF) सेटलमेंट के लिए 40 से 45 दिन, और कई बार 90 दिन तक का समय लग जाता था। अब इस समस्या का समाधान सामने आया है। नए श्रम नियमों के तहत कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के सिर्फ 2 कार्य दिवस के भीतर पूरा भुगतान मिल सकेगा। यह बड़ा बदलाव Code on Wages, 2019 के तहत किया गया है, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूत करना और कंपनियों की जवाबदेही तय करना है।
45 दिन के इंतजार से मिलेगी राहत
अब तक इस्तीफा देने या नौकरी से निकाले जाने के बाद कर्मचारियों को अपने बकाया भुगतान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। कागजी प्रक्रिया और औपचारिकताओं के नाम पर भुगतान महीनों तक अटका रहता था, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता था।लेकिन नए नियम के लागू होने के बाद कंपनियों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे हर स्थिति में कर्मचारी का पूरा FnF सेटलमेंट सिर्फ 2 कार्य दिवसों के भीतर कर दें।
किन परिस्थितियों में लागू होगा नया नियम?
नए नियम के अनुसार निम्न स्थितियों में कर्मचारियों को 2 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा:
- कर्मचारी द्वारा इस्तीफा देने की स्थिति
- कंपनी द्वारा कर्मचारी को नौकरी से हटाने की स्थिति
- कंपनी बंद होने की स्थिति
इससे कर्मचारियों को अपनी कमाई के लिए बार-बार कंपनी के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
FnF सेटलमेंट में क्या-क्या शामिल होता है?
फुल एंड फाइनल सेटलमेंट केवल आखिरी महीने की सैलरी तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें कई महत्वपूर्ण भुगतान शामिल होते हैं:
- अंतिम कार्य दिवस तक की पूरी सैलरी
- बची हुई छुट्टियों का लीव एन्कैशमेंट
- प्रदर्शन के आधार पर मिलने वाला बोनस और इंसेंटिव
- लागू नियमों के अनुसार ग्रेच्युटी
- ऑफिस कार्य से जुड़े खर्चों का रिइम्बर्समेंट
- आवश्यक कटौतियां जैसे टैक्स, एडवांस सैलरी या कंपनी की संपत्ति वापस न करने पर समायोजन
इन सभी का भुगतान तय समय सीमा के भीतर करना अनिवार्य होगा।
कर्मचारियों के लिए क्यों है यह बड़ा बदलाव?
विशेषज्ञों के अनुसार यह नियम नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा। इससे न केवल आर्थिक दबाव कम होगा, बल्कि कंपनियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।अब नौकरी छोड़ते समय कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल—“पैसा कब मिलेगा?”—लगभग खत्म हो जाएगा। नए नियम से कार्यस्थलों पर विश्वास और पेशेवर माहौल को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

