Love vs Marriage: प्यार या शादी पर ग्वालियर हाई कोर्ट का अनूठा फैसला, छिड़ी बहस, पति की याचिका खारिज, किसके साथ रहने की मिली अनुमति

ग्वालियर हाई कोर्ट ने बालिग महिला की इच्छा को मानते हुए उसे प्रेमी के साथ रहने की अनुमति दी। पति की याचिका खारिज हुई और महिला की सुरक्षा के लिए छह महीने की निगरानी तय की गई।

Love vs Marriage Verdict: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने एक अहम फैसले में शादीशुदा युवती को उसके प्रेमी के साथ रहने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर कोई महिला बालिग है, तो उसे अपनी जिंदगी से जुड़े फैसले खुद लेने का पूरा अधिकार है। यह मामला बंदी प्रत्यक्षीकरण यानी हेबियस कॉर्पस याचिका से जुड़ा था, जिसमें महिला के पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी को जबरन उसके प्रेमी ने अपने पास रखा है।

पति ने लगाई गुहार

महिला के पति ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि उसकी पत्नी को अनुज कुमार नाम के युवक ने गलत तरीके से अपने पास रखा हुआ है। पति ने कोर्ट से पत्नी को वापस दिलाने की मांग की थी। इसी मामले में कोर्ट ने महिला को पेश करने का आदेश दिया, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

महिला ने क्या बताया

जब महिला कोर्ट में पेश हुई, तो उसने अपनी बात खुलकर रखी। उसने कहा कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से अपने प्रेमी के साथ रह रही है। महिला ने बताया कि उसकी उम्र 19 साल है, जबकि उसके पति की उम्र 40 साल है। इस बड़े उम्र के अंतर की वजह से उनके रिश्ते में तालमेल नहीं बैठ पा रहा था। उसने यह भी कहा कि पति के घर में उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं होता था।

परिवार के साथ रहने से इंकार

महिला ने अपने माता-पिता के घर लौटने से भी साफ मना कर दिया। उसने कोर्ट से कहा कि वह अब अपने प्रेमी के साथ ही रहना चाहती है। महिला के इस बयान के बाद मामला पूरी तरह बदल गया और कोर्ट ने उसकी इच्छा को गंभीरता से लिया।

काउंसलिंग के बाद भी अडिग

कोर्ट ने पहले महिला की काउंसलिंग करवाई, ताकि वह सोच-समझकर फैसला ले सके। लेकिन काउंसलिंग के बाद भी महिला अपने फैसले पर कायम रही। उसने दोबारा साफ कहा कि वह अपने पति के पास नहीं जाना चाहती और प्रेमी के साथ ही रहना चाहती है। वहीं, महिला के प्रेमी ने भी कोर्ट में भरोसा दिलाया कि वह उसकी पूरी जिम्मेदारी उठाएगा और उसे किसी तरह की परेशानी नहीं होने देगा।

कोर्ट का अंतिम फैसला

सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने पति की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि चूंकि महिला बालिग है और अपनी मर्जी से रह रही है, इसलिए उसे रोकना सही नहीं होगा। हालांकि, कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि महिला को छह महीने तक ‘शौर्य दीदी’ निगरानी व्यवस्था के तहत रखा जाएगा, ताकि उसकी सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही वन स्टॉप सेंटर से जरूरी प्रक्रिया पूरी कर उसे मुक्त करने के आदेश भी दिए गए।

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