Home Voting Facility: चुनाव आयोग ने इस बार मतदान को और आसान बनाने के लिए एक अहम फैसला लिया है। केरल, असम और पुडुचेरी में 2.37 लाख से ज्यादा मतदाताओं को ‘होम वोटिंग’ की सुविधा दी गई है। इसका मतलब है कि अब हजारों बुजुर्ग और दिव्यांग लोग बिना मतदान केंद्र जाए, अपने घर से ही वोट डाल सकेंगे। यह कदम खासतौर पर उन लोगों के लिए राहत लेकर आया है, जिन्हें बाहर जाकर वोट देने में दिक्कत होती है।
कब तक चलेगी यह प्रक्रिया?
चुनाव आयोग के मुताबिक, 30 मार्च तक इस सुविधा से जुड़े आंकड़े सामने आ चुके हैं और कई जगहों पर होम वोटिंग शुरू भी हो गई है। यह पूरी प्रक्रिया 5 अप्रैल तक खत्म कर ली जाएगी। अगर किसी मतदाता से पहली बार संपर्क नहीं हो पाता, तो टीम दोबारा उनके घर जाएगी। इसका मकसद यही है कि कोई भी वोटर अपने अधिकार से वंचित न रह जाए।
कैसे काम करती है होम वोटिंग?
यह सुविधा खासतौर पर 85 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों और दिव्यांग (PwD) मतदाताओं के लिए है। इसके तहत वे पोस्टल बैलेट के जरिए घर बैठे वोट डाल सकते हैं। इसके लिए उन्हें चुनाव की अधिसूचना जारी होने के पांच दिन के अंदर आवेदन करना होता है। इसके बाद चुनाव की टीम उनके घर जाकर पूरी प्रक्रिया कराती है।
पारदर्शिता का रखा गया ध्यान
चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह साफ और पारदर्शी रखने के लिए भी खास इंतजाम किए हैं। जिन मतदाताओं ने होम वोटिंग का विकल्प चुना है, उनकी सूची सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को दी जाती है। साथ ही, मतदान टीम कब और कहां जाएगी, इसकी जानकारी भी पहले से साझा की जाती है। अगर उम्मीदवार चाहें, तो अपने प्रतिनिधि को टीम के साथ भेज सकते हैं।
बाकी मतदाताओं के लिए सुविधा
जो बुजुर्ग या दिव्यांग मतदाता घर से वोट नहीं देना चाहते, उनके लिए मतदान केंद्रों पर खास इंतजाम किए जाएंगे। वहां व्हीलचेयर, मदद के लिए कर्मचारी और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि किसी को परेशानी न हो।
चुनाव की तारीखें भी तय
चुनाव आयोग पहले ही केरल, असम और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान की तारीख घोषित कर चुका है। इसके अलावा तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भी चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अलग-अलग चरणों में वहां भी वोटिंग कराई जाएगी।
क्यों जरूरी है यह पहल?
होम वोटिंग की सुविधा चुनाव प्रक्रिया को और ज्यादा समावेशी बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। भारत जैसे बड़े देश में हर मतदाता की भागीदारी जरूरी है। ऐसे में यह सुविधा बुजुर्गों और दिव्यांगों को सशक्त बनाती है और लोकतंत्र को और मजबूत करती है।

