India App Based Drivers Strike Now : आज 7 फरवरी को पूरे देश में ऐप-आधारित कैब और डिलीवरी ड्राइवर हड़ताल पर चले गए। ओला, उबर, रैपिडो और पोर्टर जैसे बड़े प्लेटफॉर्म से जुड़े लाखों ड्राइवरों ने काम बंद कर दिया। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में सुबह से ही यात्रियों को कैब नहीं मिल रही। कई लोगों को दफ्तर और एयरपोर्ट पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
यूनियनों का बड़ा प्रदर्शन
यह हड़ताल तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन और इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-आधारित ट्रांसपोर्ट वर्कर्स के नेतृत्व में हो रही है। पिछले साल 31 दिसंबर को डिलीवरी बॉयज की हड़ताल के बाद यह गिग वर्कर्स का दूसरा बड़ा विरोध प्रदर्शन है। यूनियनों का कहना है कि कंपनियां लगातार नियमों की अनदेखी कर रही हैं और ड्राइवरों की आय घटती जा रही है।
नियम लागू न होने की शिकायत
ड्राइवरों का सबसे बड़ा आरोप है कि केंद्र सरकार की मोटर वाहन एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025 ठीक से लागू नहीं हो रही हैं। इन नियमों के बावजूद कंपनियां अपनी मर्जी से किराया तय कर रही हैं। यूनियनों ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर कहा कि बिना तय किराया ढांचे के ड्राइवरों की कमाई अस्थिर हो गई है और काम की स्थिति कठिन होती जा रही है।
ड्राइवरों की मुख्य मांगें
ड्राइवर चाहते हैं कि सरकार ऐप-आधारित सेवाओं के लिए न्यूनतम किराया तय करे। यह किराया यूनियनों से बातचीत के बाद तय किया जाए। साथ ही, पारदर्शी किराया प्रणाली के लिए सरकारी निगरानी भी जरूरी बताई जा रही है। ड्राइवरों ने निजी सफेद नंबर प्लेट वाहनों के कमर्शियल इस्तेमाल पर रोक लगाने की भी मांग की है, ताकि पीली प्लेट वाले व्यावसायिक ड्राइवरों की कमाई प्रभावित न हो।
पैनिक बटन का अतिरिक्त खर्च
महाराष्ट्र कामगार सभा ने एक और मुद्दा उठाया है। सरकार ने सुरक्षा के लिए पैनिक बटन लगाना अनिवार्य किया है, लेकिन कई कंपनियों को अवैध घोषित कर दिया गया। इससे ड्राइवरों को पुराने उपकरण हटाकर नए लगवाने में लगभग 12 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। ड्राइवरों का कहना है कि यह अतिरिक्त बोझ उनकी आर्थिक हालत और खराब कर रहा है।
ऐप पर बढ़ा किराया
हड़ताल के कारण आज कई शहरों में ऐप खोलने पर ‘नो कैब्स अवेलेबल’ दिख रहा है। जहां कैब मिल भी रही है, वहां किराया सामान्य से तीन से चार गुना ज्यादा है। इसी बीच दिल्ली में सरकार समर्थित ‘भारत टैक्सी’ ऐप की लॉन्चिंग चर्चा में है। यह ऐप बिना कमीशन और बिना सर्ज प्राइस के मॉडल का दावा कर रही है, जिसे ड्राइवर बेहतर विकल्प मान रहे हैं।
सरकार और कंपनियों का रुख
अब तक ओला, उबर और रैपिडो जैसी कंपनियों ने हड़ताल पर आधिकारिक बयान नहीं दिया है। वहीं विपक्षी नेताओं ने संसद में गिग वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा उठाया है। मांग की जा रही है कि सरकार जल्द समाधान निकाले, ताकि ड्राइवरों और यात्रियों दोनों को राहत मिल सके।


