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UN Reform: भारत ने यूएनएससी में फिर उठाई सुधार की मांग, कहा- दुनिया बदल चुकी है, अब स्थायी सदस्यता जरूरी

India UNSC Reform Demand: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी यूएनएससी में व्यापक सुधार और विस्तार की मांग एक बार फिर जोरदार तरीके से उठाई है। संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रभारी राजदूत योजना पटेल ने कहा कि वर्ष 1945 में बनी सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना आज की दुनिया की वास्तविकताओं को नहीं दर्शाती। भारत का कहना है कि करीब 80 साल पुरानी व्यवस्था को बदलना अब सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि वैश्विक चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए जरूरी हो गया है।

स्थायी सदस्यता बढ़े

भारत ने सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में सदस्य संख्या बढ़ाने की वकालत की है। नई दिल्ली का विशेष जोर ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देने पर है। भारत चाहता है कि बदलती वैश्विक शक्ति और संयुक्त राष्ट्र की बढ़ती सदस्यता के अनुरूप सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, प्रभावी और पारदर्शी बनाया जाए। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के विस्तार की मांग करता रहा है।

पारदर्शिता पर जोर

भारत ने सुरक्षा परिषद के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने की जरूरत भी बताई। योजना पटेल ने कहा कि अस्थायी सदस्यों को परिषद के दस्तावेजों तक बेहतर और समय पर पहुंच मिलनी चाहिए। भारत का मानना है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया जितनी पारदर्शी होगी, सुरक्षा परिषद की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता उतनी ही मजबूत होगी। नई दिल्ली ने यह भी कहा कि किसी देश की सदस्यता का इस्तेमाल संकीर्ण राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

आतंकवाद पर सवाल

भारत ने आतंकवादियों की सूची से जुड़े मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप पर भी कड़ी आपत्ति जताई। योजना पटेल ने कहा कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता का इस्तेमाल आतंकवादी संगठनों या व्यक्तियों के निष्पक्ष मूल्यांकन में दखल देने के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी आतंकवादी को सूची से हटाकर वैधता देने की कोशिश या बिना ठोस सबूत के राजनीतिक कारणों से किसी संस्था को आतंकी संगठन घोषित करना उचित नहीं है।

छिपे वीटो का आरोप

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समितियों में पारदर्शिता की कमी का मुद्दा उठाता रहा है। नई दिल्ली के मुताबिक किसी प्रस्ताव को खारिज करने या उसे तकनीकी रूप से रोकने के कारण अक्सर सार्वजनिक नहीं किए जाते। भारत ने खास तौर पर सुरक्षा परिषद की 1267 अल-कायदा प्रतिबंध समिति के संदर्भ में ऐसी प्रक्रिया को कई बार ‘छिपा हुआ वीटो’ बताया है। भारत समर्थित आतंकवादियों की सूची में शामिल करने के प्रस्तावों को अतीत में चीन की ओर से रोक या तकनीकी होल्ड का सामना करना पड़ा है।

ग्लोबल साउथ की आवाज

भारत का कहना है कि आज की वैश्विक व्यवस्था में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका सहित ग्लोबल साउथ की भूमिका लगातार बढ़ी है, लेकिन सुरक्षा परिषद की संरचना में इसका पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिखता। इसलिए सुधार के तहत स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों का विस्तार किया जाना चाहिए। भारत ने स्पष्ट किया कि दुनिया की बदलती परिस्थितियों के बीच सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने में देरी वैश्विक संस्थाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है।

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