Semiconductor: धोलरा बनेगा सेमीकंडक्टर का हब, ASML की एडवांस्ड लिथोग्राफी तकनीक से भारत बनेगा सिरमौर

धोलरा में ASML की लिथोग्राफी तकनीक से सेमीकंडक्टर निर्माण भारत के लिए बड़ा कदम है। इससे आत्मनिर्भरता, रोजगार और टेक्नोलॉजी विकास को बढ़ावा मिलेगा और भारत वैश्विक चिप हब बनने की ओर बढ़ेगा।

Semiconductor New Beginning: भारत में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री तेजी से आगे बढ़ रही है। अब तक देश को चिप्स के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन यह स्थिति बदल रही है। गुजरात के धोलरा में लग रहे सेमीकंडक्टर प्लांट्स इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल हैं। यहां दुनिया की सबसे एडवांस्ड लिथोग्राफी मशीनों का इस्तेमाल होगा, जो नीदरलैंड्स की कंपनी ASML बनाती है। लिथोग्राफी को चिप बनाने की सबसे जटिल और सटीक प्रक्रिया माना जाता है। इसमें सिलिकॉन वेफर पर नैनोमीटर स्तर पर सर्किट प्रिंट किए जाते हैं। यह काम इतना बारीक होता है कि एक छोटी सी गलती भी पूरी चिप को बेकार कर सकती है।

भारत के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम

दुनिया में इस तकनीक में ASML सबसे आगे है और लगभग हर आधुनिक चिप इन्हीं की मशीनों से बनती है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नीदरलैंड्स के वेल्डहोवन में ASML के मुख्यालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वहां की तकनीक को करीब से समझा। उन्होंने बताया कि धोलरा में लगने वाले सेमीकंडक्टर फैब में ASML के लिथोग्राफी टूल्स का इस्तेमाल किया जाएगा। यह भारत के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम है।
अश्विनी वैष्णव के अनुसार, भारत ने सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में नई शुरुआत की है। लिथोग्राफी पूरी प्रक्रिया का सबसे कठिन हिस्सा होती है और ASML इस क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी है। अब जब भारत में ही ऐसी तकनीक आ रही है, तो कई दूसरी सेमीकंडक्टर मशीनरी बनाने वाली कंपनियां भी भारत में निवेश करने पर विचार कर रही हैं। इसकी वजह भारत की मजबूत डिजाइन क्षमता, कुशल युवा और सरकार की स्थिर नीतियां हैं।

धोलरा भले ही अभी एक छोटा शहर है, लेकिन आने वाले समय में यह भारत की सेमीकंडक्टर क्रांति का केंद्र बनेगा। यहां लगने वाला प्लांट 2026 से कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर सकता है। देश में कुल चार सेमीकंडक्टर प्लांट्स लगाए जा रहे हैं, जो 2026 के आसपास चिप्स बनाना शुरू करेंगे। इससे न सिर्फ आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि हजारों लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

कैसे काम करती है लिथोग्राफी

लिथोग्राफी कैसे काम करती है, इसे आसान शब्दों में समझें। पहले सिलिकॉन वेफर पर एक खास केमिकल लगाया जाता है, जिसे फोटोरेजिस्ट कहते हैं। फिर उस पर रोशनी की मदद से सर्किट का पैटर्न डाला जाता है। जहां रोशनी पड़ती है, वहां केमिकल बदल जाता है। इसके बाद अलग-अलग प्रोसेस से सर्किट तैयार होता है। यह प्रक्रिया कई बार दोहराई जाती है, तब जाकर एक पूरी चिप बनती है।
जब धोलरा में ऐसी आधुनिक तकनीक काम करने लगेगी, तो भारत मोबाइल, कंप्यूटर, गाड़ियां और डिफेंस जैसे क्षेत्रों के लिए खुद चिप्स बना सकेगा। यह न सिर्फ अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि देश की सुरक्षा और तकनीकी ताकत भी बढ़ाएगा।

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