Uproar in public hearing: कासगंज की सदर तहसील में शनिवार को आयोजित समाधान दिवस जनसुनवाई के दौरान अचानक हंगामा खड़ा हो गया। जमीन कब्जे की शिकायत लेकर पहुंचे एक पीड़ित युवक के साथ पुलिस के कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आया, जिससे पूरे परिसर में चर्चा शुरू हो गई।
पोस्टर लेकर पहुंचा फरियादी
बताया जा रहा है कि पीड़ित युवक अपनी जमीन पर कब्जे की शिकायत लेकर कमिश्नर संगीता सिंह की जनसुनवाई में पहुंचा था। वह प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने के लिए पोस्टर भी साथ लाया था, लेकिन जनसुनवाई कक्ष तक पहुंचने से पहले ही पुलिस ने उसे रोक लिया।
पुलिस पर गंभीर आरोप
पीड़ित संतोष गौड़, निवासी मोहल्ला जय-जय राम, थाना सदर कोतवाली क्षेत्र, ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसके साथ धक्का-मुक्की की। उसका कहना है कि पुलिसकर्मियों ने उसे जबरन पकड़कर तहसील परिसर से बाहर घसीट लिया और उसकी बात सुने बिना वाहन में बैठा लिया।
हवालात में बंद करने का दावा
संतोष गौड़ का आरोप है कि पुलिस उसे सीधे सदर कोतवाली ले गई, जहां उसे हवालात में बंद कर दिया गया। उसने कहा कि वह सिर्फ अपनी जमीन पर हो रहे कथित कब्जे की शिकायत करने आया था और न्याय की उम्मीद लेकर जनसुनवाई में पहुंचा था।
जमीन पर कब्जे का विवाद
पीड़ित का कहना है कि पहाड़पुर माफी स्थित गाटा संख्या 215/210 स की जमीन उसके नाम दर्ज है। उसका आरोप है कि कुछ भाजपा से जुड़े लोगों की मिलीभगत से उसकी जमीन पर अवैध कब्जा कराने की कोशिश की जा रही है। उसने प्रशासन पर भी मामले को गंभीरता से न लेने का आरोप लगाया।
पहले भी कर चुका शिकायत
संतोष गौड़ के मुताबिक, वह इस मामले की शिकायत आईजीआरएस पोर्टल और लखनऊ में मुख्यमंत्री जनता दरबार में भी कर चुका है। इसके बावजूद, उसका कहना है कि मामले में गलत रिपोर्ट लगाकर निस्तारण दिखा दिया गया, जबकि उसके पास जमीन के कागजात मौजूद हैं।
प्रशासन पर उठे सवाल
इस घटना के बाद तहसील और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों में भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पीड़ित ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
