Sting Operation: महामंडलेश्वर पद पर सौदेबाजी का दावा, 20 लाख कैश या जमीन की शर्त से अखाड़ों पर उठे सवाल

एक दैनिक अखबार की इन्वेस्टिगेटर टीम ने अपनी पड़ताल में महामंडलेश्वर पद को लेकर कथित सौदेबाजी का दावा किया है। रिपोर्ट में जूना, निर्वाणी और निर्मोही अखाड़ों के कुछ महंतों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

Mahamandaleshwar Sting Operation

Mahamandaleshwar Sting Operation:सनातन धर्म में महामंडलेश्वर का पद बेहद प्रतिष्ठित और महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पद माना जाता है। इसी पद को लेकर एक अखबार की इन्वेस्टिगेटर टीम की एक स्टिंग पड़ताल सामने आई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ अखाड़ों के ऊंचे पदों पर बैठे महंतों ने महामंडलेश्वर बनाने के बदले पैसे या जमीन से जुड़ी शर्तें रखीं। इस दावे ने धार्मिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली और चयन प्रक्रिया को लेकर बहस छेड़ दी है।

20 लाख का ऑफर

रिपोर्ट के मुताबिक, पड़ताल के दौरान कथित तौर पर ऐसा ऑफर दिया गया कि इच्छुक व्यक्ति को महामंडलेश्वर का पद दिलाया जा सकता है। इसके बदले करीब 20 लाख रुपये का आर्थिक व्यवहार करने की बात कही गई। रिपोर्ट में जमीन से जुड़ी शर्त का भी उल्लेख है। दावा है कि कुछ मामलों में आश्रम के नाम जमीन ट्रांसफर करने की बात सामने आई। हालांकि, ये सभी बातें स्टिंग में सामने आए कथित बयानों पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

तीन अखाड़ों का दावा

रिपोर्ट के अनुसार, यह पड़ताल तीन प्रमुख अखाड़ों—जूना, निर्वाणी और निर्मोही—से जुड़े कुछ महंतों तक पहुंची। रिपोर्ट में दावा किया गया कि इनसे बातचीत के दौरान महामंडलेश्वर बनाए जाने को लेकर अलग-अलग तरह की शर्तों और प्रक्रियाओं की जानकारी सामने आई। प्रत्येक अखाड़े की अपनी परंपरा और व्यवस्था होती है, लेकिन स्टिंग में सामने आए कथित दावों ने इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

‘जो कहोगे वही पद’

पड़ताल में कथित तौर पर एक महंत की ओर से कहा गया कि इच्छुक व्यक्ति की मांग के मुताबिक पद दिया जा सकता है और महामंडलेश्वर बनाया जा सकता है। इसके लिए 20 लाख रुपये के आर्थिक व्यवहार की बात कही गई। रिपोर्ट में ऐसे कथित संवादों को आधार बनाकर यह सवाल उठाया गया है कि क्या धार्मिक पदों की नियुक्ति में आध्यात्मिक योग्यता के बजाय आर्थिक लेनदेन की भूमिका बढ़ रही है।

जमीन की शर्त भी

मामले का दूसरा गंभीर पहलू जमीन से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ बातचीत में आश्रम के नाम जमीन ट्रांसफर करने की शर्त का दावा सामने आया। धार्मिक आश्रमों और संस्थाओं की संपत्ति श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी होती है। इसलिए यदि पद के बदले जमीन लेने की बात वास्तव में सामने आती है, तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है। साथ ही संबंधित महंतों और अखाड़ों का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण है।

पद की गरिमा पर सवाल

महामंडलेश्वर का पद संत समाज में आध्यात्मिक प्रतिष्ठा और जिम्मेदारी से जुड़ा माना जाता है। ऐसे में स्टिंग के जरिए सामने आए कथित लेनदेन के दावे इस पद की गरिमा और अखाड़ों की आंतरिक चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हैं। फिलहाल रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का विस्तृत जवाब सामने आना बाकी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह धार्मिक संस्थाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता के लिए बड़ा मुद्दा बन सकता है।

Disclaimer: इस खबर में सामने आए आरोपों को रिपोर्ट के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। News1India आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

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