New Labour Codes: भारत में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए नए लेबर कोड्स एक बड़ी राहत लेकर आने वाले हैं। सरकार ने पुराने और जटिल कानूनों को आसान बनाने के लिए कई बदलाव किए हैं। इन नए नियमों से खासकर अनौपचारिक सेक्टर, गिग वर्कर्स, प्रवासी मजदूर और महिलाओं को सीधा फायदा मिलेगा। अब उन्हें बेहतर वेतन, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। साथ ही नौकरी छोड़ने के बाद मिलने वाला पैसा भी जल्दी मिल जाएगा, जिससे कर्मचारियों की परेशानियां कम होंगी।
क्या हैं नए लेबर कोड्स
पहले भारत में कुल 29 अलग-अलग लेबर कानून लागू थे, जिन्हें समझना काफी मुश्किल होता था। इसी परेशानी को दूर करने के लिए सरकार ने इन्हें 4 बड़े कोड्स में बदल दिया है। इनमें कोड ऑन वेजेज (2019), इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड (2020), कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (2020) और OSHWC कोड (2020) शामिल हैं। इनका मकसद कर्मचारियों और कंपनियों दोनों के लिए नियमों को आसान और साफ बनाना है।
फुल एंड फाइनल सेटलमेंट में बड़ा बदलाव
नए नियमों के तहत अब कंपनियों को किसी भी कर्मचारी का फुल एंड फाइनल (F&F) सेटलमेंट सिर्फ 2 दिन के अंदर करना होगा। पहले इसमें 30 से 45 दिन तक का समय लग जाता था, जिससे कर्मचारियों को काफी दिक्कत होती थी। अब जैसे ही नोटिस पीरियड खत्म होगा, कंपनी को 2 दिनों के भीतर सैलरी, लीव एन्कैशमेंट, बोनस और ग्रेच्युटी (अगर बनती है) का भुगतान करना होगा। इससे नौकरी बदलने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
बोनस और इंसेंटिव का क्या होगा
कुछ मामलों में बोनस और इंसेंटिव तुरंत तय नहीं हो पाते, खासकर जब कर्मचारी इस्तीफा देता है या लेऑफ होता है। ऐसे में ये पेमेंट बाद में दिए जा सकते हैं। यह पूरी तरह कंपनी की पॉलिसी पर निर्भर करेगा। हालांकि, बाकी जरूरी भुगतान समय पर करना अनिवार्य होगा।
कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण नियम
कंपनियों के लिए 2 दिन में सेटलमेंट पूरा करना आसान नहीं होगा। इसके लिए उन्हें अटेंडेंस चेक करना, छुट्टियों का हिसाब लगाना, टैक्स काटना और अलग-अलग विभागों से मंजूरी लेनी होती है। ऐसे में कंपनियों को अपने सिस्टम को और बेहतर बनाना पड़ेगा, ताकि वे समय पर सभी प्रक्रियाएं पूरी कर सकें।
ग्रेच्युटी नियमों में बड़ा बदलाव
फिक्स्ड-टर्म या कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी नियमों में बड़ी राहत दी गई है। पहले इसके लिए 5 साल तक लगातार काम करना जरूरी था, लेकिन अब यह अवधि घटाकर सिर्फ 1 साल कर दी गई है। यानी अब ऐसे कर्मचारी भी जल्दी ग्रेच्युटी पाने के हकदार होंगे।
गिग वर्कर्स को मिलेगा फायदा
नए लेबर कोड्स में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी शामिल किया गया है। अब उन्हें हेल्थ इंश्योरेंस, एक्सीडेंट कवर और अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं मिलेंगी। इससे पहली बार अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर के लोगों को भी सुरक्षा का दायरा मिलेगा।
टैक्स-फ्री ग्रेच्युटी की सीमा बढ़ी
सरकार ने टैक्स-फ्री ग्रेच्युटी की लिमिट बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी है, जो पहले 10 लाख रुपये थी। साथ ही कंपनियों को 30 दिन के अंदर ग्रेच्युटी का भुगतान करना होगा। अगर इसमें देरी होती है, तो 10% सालाना ब्याज देना पड़ेगा। यह नियम सरकारी और प्राइवेट दोनों सेक्टर पर लागू होगा।
कर्मचारियों के लिए फायदेमंद बदलाव
नए लेबर कोड्स कर्मचारियों के लिए कई सुविधाएं लेकर आए हैं। इससे न सिर्फ उनकी आर्थिक सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि कामकाजी माहौल भी बेहतर होगा। यह बदलाव आने वाले समय में नौकरीपेशा लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं।

