Budget Speech: हर साल केंद्रीय बजट के साथ एक दिलचस्प सवाल जरूर उठता है कि इस बार वित्त मंत्री का भाषण कितनी देर चलेगा और क्या कोई नया रिकॉर्ड बनेगा। बजट 2026 में यह सवाल इसलिए और अहम हो गया, क्योंकि निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार लोकसभा में बजट पेश कर रही थीं। उनके पिछले लंबे भाषणों को देखते हुए सबकी नजर इस बात पर थी कि क्या वह अपने ही पुराने रिकॉर्ड को तोड़ पाएंगी या नहीं।
2026 का बजट भाषण कितना लंबा रहा
साल 2026 में निर्मला सीतारमण का बजट भाषण करीब 1 घंटा 26 मिनट तक चला। यह समय अपने आप में लंबा माना जाता है, लेकिन यह उनके सबसे लंबे भाषण का रिकॉर्ड नहीं तोड़ सका। अब भी सबसे लंबा बजट भाषण 2020-21 का ही है, जो 2 घंटे 42 मिनट तक चला था। उस भाषण के दौरान तबीयत खराब होने की वजह से उन्हें बीच में रुकना पड़ा था और बजट के आखिरी दो पन्ने पढ़े नहीं जा सके थे। इसके बावजूद समय के लिहाज से वही भाषण इतिहास में दर्ज हो गया।
पिछले वर्षों में बजट भाषण की अवधि
निर्मला सीतारमण के बजट भाषण हर साल चर्चा में रहते हैं।
2019-20 में उनका भाषण 2 घंटे 17 मिनट का था।
2020-21 में यह बढ़कर 2 घंटे 42 मिनट हो गया, जो अब तक का सबसे लंबा है।
2021-22 में भाषण करीब 100 मिनट चला।
2022-23 में समय घटकर लगभग 92 मिनट रहा।
2023-24 में यह करीब 87 मिनट का था।
अंतरिम बजट 2024 लोकसभा चुनाव के कारण लगभग 56 मिनट का रहा।
पूर्ण बजट 2024-25 में भाषण करीब 1 घंटा 25 मिनट चला।
आठवां बजट भाषण लगभग 77 मिनट का रहा।
नौवां बजट भाषण, यानी 2026 का, करीब 1 घंटा 26 मिनट चला।
इन आंकड़ों से साफ है कि उनके भाषण हमेशा लंबे, विस्तार से भरे और नीतियों की गहराई बताने वाले रहे हैं।
निर्मला सीतारमण से पहले कौन था रिकॉर्डधारी
निर्मला सीतारमण से पहले सबसे लंबे बजट भाषण का रिकॉर्ड जसवंत सिंह के नाम था। उन्होंने 2003 में लगभग 2 घंटे 15 मिनट का भाषण दिया था। इसके अलावा अरुण जेटली का 2014 का बजट भाषण भी काफी लंबा माना जाता है, जो करीब 2 घंटे 10 मिनट का था।
सबसे छोटा और सबसे लंबा बजट भाषण
स्वतंत्र भारत में सबसे छोटा बजट भाषण 1977 में हीरूभाई एम. पटेल ने दिया था, जिसमें सिर्फ 800 शब्द थे। सबसे छोटा पूर्ण बजट वाई. बी. चह्वाण का था। शब्दों के लिहाज से सबसे लंबा बजट भाषण मनमोहन सिंह ने 1991 में दिया था, जिसमें करीब 18,700 शब्द थे। इसके बाद यशवंत सिन्हा और मोरारजी देसाई का नाम आता है।
बजट भाषण क्यों बनते हैं इतिहास
केंद्रीय बजट भाषण सिर्फ आर्थिक घोषणाएं नहीं होते, बल्कि ये देश के लोकतांत्रिक इतिहास का अहम हिस्सा होते हैं। निर्मला सीतारमण के लंबे और विस्तार से भरे भाषणों ने उन्हें बजट इतिहास में एक अलग पहचान दी है, जिनकी चर्चा आगे भी होती रहेगी।
