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कामकोटि को पद्मश्री मिलने पर कांग्रेस ने क्या की थी टिप्पणी, जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू का मुंहतोड़ जवाब

पद्मश्री मिलने पर कांग्रेस की टिप्पणी से विवाद हुआ। जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने प्रोफेसर कामकोटि का समर्थन करते हुए उनकी योग्यता और राष्ट्र सेवा को सामने रखा।

SYED BUSHRA by SYED BUSHRA
January 28, 2026
in राष्ट्रीय
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Padma Shri Debate: प्रोफेसर वी. कामकोटि को पद्मश्री पुरस्कार दिए जाने के बाद कांग्रेस की एक टिप्पणी ने राजनीतिक और बौद्धिक बहस को जन्म दे दिया। इस टिप्पणी पर खुद प्रोफेसर कामकोटि ने कोई सीधा जवाब नहीं दिया, लेकिन जोहो (Zoho) के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने कांग्रेस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए खुलकर उनका बचाव किया। उन्होंने साफ कहा कि प्रोफेसर कामकोटि इस सम्मान के पूरी तरह योग्य हैं।

कांग्रेस की टिप्पणी से बढ़ा विवाद

केरल कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा की। इस पोस्ट में उन्होंने कामकोटि को पद्मश्री मिलने की बधाई तो दी, लेकिन साथ ही तंज भी कसा। पोस्ट में कहा गया कि IIT मद्रास में गाय के मूत्र पर किए गए उनके रिसर्च को देश ने पहचाना है और यही रिसर्च गोमूत्र को दुनिया के मंच तक ले जा रहा है। इस व्यंग्यात्मक टिप्पणी को कई लोगों ने अपमानजनक और गैर-ज़रूरी बताया।

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श्रीधर वेम्बू का जोरदार पलटवार

इस तंज का जवाब देते हुए श्रीधर वेम्बू ने कांग्रेस की सोच पर सवाल उठाए। उन्होंने एक्स पर लिखा कि प्रोफेसर कामकोटि डीप टेक जैसे अहम क्षेत्र में काम करते हैं, खासकर माइक्रो-प्रोसेसर डिजाइन में। वे IIT मद्रास के निदेशक हैं, जो भारत का सबसे अच्छा तकनीकी संस्थान माना जाता है। इसके अलावा, वह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB) में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वेम्बू के अनुसार, इन सभी योगदानों के कारण कामकोटि इस सम्मान के पूरी तरह हकदार हैं।

पारंपरिक ज्ञान और विज्ञान की बात

श्रीधर वेम्बू ने पारंपरिक विषयों पर होने वाले शोध का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि गाय के गोबर और मूत्र में ऐसे सूक्ष्म जीव होते हैं, जिनका वैज्ञानिक महत्व हो सकता है। उनके मुताबिक, इन्हें बिना जांचे खारिज करना एक तरह की गुलाम औपनिवेशिक सोच को दिखाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भविष्य में हार्वर्ड या MIT जैसे संस्थान इस पर रिसर्च करें, तो वही लोग इसे सच मान लेंगे जो आज इसका मजाक उड़ा रहे हैं।

कामकोटि ने क्या कहा

पद्मश्री पुरस्कार को लेकर प्रोफेसर वी. कामकोटि ने इसे अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं माना। 25 जनवरी को जारी एक वीडियो में उन्होंने कहा कि यह सम्मान एक सामूहिक प्रयास का नतीजा है। उनके अनुसार, पद्मश्री का उनके लिए एक ही मतलब है कि वह विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के लिए पूरी मेहनत से काम करते रहेंगे। उन्होंने यह पुरस्कार उन सभी लोगों को समर्पित किया, जिनके सहयोग से यह संभव हो पाया।

Tags: Indian AwardsScience and Tradition
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