PM Kisan Samman Nidhi:आगरा में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के हजारों लाभार्थियों की परेशानी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। पति-पत्नी दोनों के नाम पर योजना का लाभ लेने के मामले में कार्रवाई की जद में आए 35 हजार से अधिक किसान दंपतियों को अब तक राहत नहीं मिल सकी है। खास बात यह है कि इन दंपतियों ने पति या पत्नी में से किसी एक के नाम पर सम्मान निधि जारी रखने की सहमति भी दे दी है, लेकिन इसके बावजूद भुगतान बहाल नहीं हुआ है।
दो से तीन साल से इंतजार
किसानों का कहना है कि उन्होंने विभाग के निर्देशों के अनुसार एक ही सदस्य के नाम पर योजना का लाभ लेने की सहमति दे दी थी। इसके बावजूद दो से तीन साल बीतने के बाद भी उनके खाते में सम्मान निधि की किस्त नहीं पहुंची है। लगातार भुगतान अटके रहने से किसानों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
समस्या के समाधान की उम्मीद में किसान आए दिन उप कृषि निदेशक कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। वहां पहुंचकर वे अपनी शिकायत दर्ज कराते हैं और रुकी हुई सम्मान निधि दोबारा शुरू कराने की मांग करते हैं। हालांकि, लंबे समय से इंतजार कर रहे किसानों को अब तक कोई ठोस राहत नहीं मिल पाई है।
इस वजह से रुकी किस्त
दरअसल, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत एक परिवार में पति और पत्नी दोनों के नाम पर लाभ लेने के मामले सामने आए थे। इसके बाद विभाग ने ऐसे लाभार्थियों के खातों की जांच शुरू कराई थी। जांच में एक ही परिवार के दो सदस्यों के नाम पर सम्मान निधि लेने वाले मामले सामने आने के बाद संबंधित खातों का भुगतान रोक दिया गया।
योजना के नियमों के मुताबिक, एक परिवार में पति या पत्नी में से किसी एक को ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ दिया जा सकता है। इसी नियम के आधार पर विभाग ने ऐसे दंपतियों के खातों पर कार्रवाई की थी। आगरा जिले में इस कार्रवाई के दायरे में 35 हजार से अधिक किसान दंपति आ गए थे।
शासन से केंद्र तक प्रक्रिया
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, ऐसे मामलों में जिला स्तर पर प्राप्त शिकायतों और प्रकरणों को शासन के पास भेजा जाता है। वहां से मामला प्रदेश स्तर पर आगे बढ़ता है और फिर केंद्र सरकार तक पहुंचता है। केंद्र से प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पात्र किसानों के खातों में किस्त दोबारा जारी होने का रास्ता साफ होता है।
अधिकारियों का कहना है कि जिला स्तर से मामलों को शासन को भेजा जा रहा है, लेकिन भुगतान शुरू करने का फैसला उनके स्तर पर नहीं होता। ऐसे में किसानों को किस्त बहाल होने के लिए प्रदेश और केंद्र स्तर की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना पड़ रहा है।
किसानों की बढ़ती परेशानी
सबसे बड़ी दिक्कत उन किसानों के सामने है, जिन्होंने नियमों के अनुसार एक सदस्य के नाम पर लाभ लेने की सहमति दे दी है। इसके बाद भी उनकी सम्मान निधि बहाल नहीं हुई। दो से तीन साल से भुगतान अटका होने के कारण किसानों में नाराजगी है। अब उनकी मांग है कि लंबित मामलों का जल्द निस्तारण कर पात्र लाभार्थियों की किस्त दोबारा शुरू की जाए।

