UNESCO की सूची में शामिल हुआ सारनाथ, पीएम मोदी ने बताया गर्व का क्षण राजनीतिक हलचल से अलग पीएम मोदी ने सारनाथ को लेकर जताई प्रसन्नता

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सारनाथ को UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने पर खुशी जताई। उन्होंने इसे भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का सम्मान बताया तथा कहा कि इससे दुनिया भर के लोग भगवान बुद्ध के संदेश से जुड़ने के लिए सारनाथ आएंगे।

Sarnath UNESCO World Heritage: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के समाप्त होने के ऐलान के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा का विषय बन गई। जहां सोशल मीडिया पर इस्तीफे और आंदोलन को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही थीं, वहीं प्रधानमंत्री ने अपना ध्यान एक अलग और ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर केंद्रित किया।

UNESCO ने सारनाथ को विश्व धरोहर सूची में किया शामिल

यूनेस्को ने उत्तर प्रदेश के प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने की घोषणा की। संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसकी जानकारी साझा करते हुए इसे भारत की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक उपलब्धि बताया।

पीएम मोदी ने जताया गर्व

यूनेस्को की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि सारनाथ का भगवान बुद्ध से गहरा संबंध है, जिनका ज्ञान, करुणा और सद्भाव का संदेश आज भी पूरी दुनिया को प्रेरित करता है।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि यह सम्मान भारत की समृद्ध सभ्यतागत और आध्यात्मिक विरासत का वैश्विक स्तर पर सम्मान है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मान्यता के बाद दुनिया भर से अधिक लोग सारनाथ आएंगे और भगवान बुद्ध के विचारों से प्रेरणा लेंगे।

सारनाथ का ऐतिहासिक महत्व

वाराणसी से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित सारनाथ बौद्ध धर्म का प्रमुख तीर्थ स्थल माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश यहीं दिया था। इसी कारण यह स्थान बौद्ध अनुयायियों के लिए विशेष आस्था और ऐतिहासिक महत्व रखता है।

बीजेपी ने धर्मेंद्र प्रधान के समर्थन में जताया भरोसा

इधर, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भाजपा नेताओं ने उनके समर्थन में बयान दिए। पार्टी नेताओं ने नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और शिक्षा क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए अपना निर्णय लिया।

 

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