Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन पर चंद्रग्रहण, लाल दिखेगा चांद, जानिए भारत में कब बांधी जाएगी राखी

रक्षा बंधन 2026 पर आंशिक चंद्रग्रहण करीब 5 घंटे 39 मिनट तक रहेगा, लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए सूतक मान्य नहीं होगा और श्रद्धालु 28 अगस्त को शुभ मुहूर्त में बिना किसी बाधा के राखी बांध सकेंगे।

Raksha Bandhan 2026 Lunar Eclipse

Raksha Bandhan & Lunar Eclipse: रक्षा बंधन 2026 इस बार एक खास खगोलीय घटना के साथ मनाया जाएगा। 28 अगस्त को आंशिक चंद्रग्रहण लगेगा, जिसकी कुल अवधि लगभग 5 घंटे 39 मिनट रहेगी। इस ग्रहण के दौरान दुनिया के कुछ हिस्सों में चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देगा, जिसे आमतौर पर ‘ब्लड मून’ कहा जाता है। हालांकि भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, क्योंकि उस समय यहां दिन रहेगा और चंद्रमा क्षितिज के ऊपर नहीं होगा।

भारत में राखी कब?

पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। पंचांग के अनुसार रक्षा बंधन का पर्व 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। चूंकि ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए सूतक काल भी मान्य नहीं माना जाएगा। ऐसे में बहनें निर्धारित शुभ मुहूर्त में अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी और पूजा-पाठ सामान्य रूप से किया जाएगा।

कहां दिखेगा लाल चांद?

यह आंशिक चंद्रग्रहण उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका तथा अटलांटिक महासागर के आसपास के कई क्षेत्रों में दिखाई देगा। इन इलाकों में पृथ्वी की छाया चंद्रमा के बड़े हिस्से को ढक देगी, जिससे चंद्रमा लाल या तांबे जैसा रंग लिए नजर आ सकता है। भारत सहित कई एशियाई देशों में यह दृश्य दिखाई नहीं देगा।

सूतक और धार्मिक मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का सूतक केवल वहीं प्रभावी माना जाता है, जहां ग्रहण दिखाई देता है। क्योंकि 28 अगस्त का चंद्रग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए मंदिरों के पट बंद करने, पूजा रोकने या अन्य धार्मिक प्रतिबंध लागू नहीं होंगे। श्रद्धालु सामान्य रूप से पूजा-अर्चना कर सकेंगे और रक्षा बंधन के सभी अनुष्ठान संपन्न होंगे।

त्योहार का महत्व

रक्षा बंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और सुरक्षा का प्रतीक है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसकी लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, जबकि भाई जीवनभर उनकी रक्षा का वचन देता है। इस वर्ष चंद्रग्रहण को लेकर बनी उलझन के बावजूद भारत में पर्व पूरे उत्साह और पारंपरिक विधि-विधान के साथ मनाया जाएगा।

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