Repo Rate Unchanged: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी ताजा समीक्षा बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर ही बरकरार रखने का फैसला किया है। लगातार चौथी बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। रेपो रेट वह दर होती है, जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक कर्ज उपलब्ध कराता है। जब इस दर में कटौती होती है तो बैंकों के लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाता है, जिसका फायदा ग्राहकों को कम ब्याज दर और कम EMI के रूप में मिल सकता है। लेकिन इस बार भी रेपो रेट स्थिर रहने से आम लोगों को ऐसी कोई राहत नहीं मिलेगी। RBI का मानना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में सतर्क रुख अपनाना अधिक जरूरी है।
EMI पर क्या असर होगा?
रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ेगा, जो होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की EMI चुका रहे हैं। फ्लोटिंग ब्याज दर वाले अधिकांश लोन की मासिक किस्तें फिलहाल पहले जैसी ही रहेंगी। जिन ग्राहकों को उम्मीद थी कि इस बार ब्याज दर घटेगी और उनकी EMI कम होगी, उन्हें अभी और इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि कुछ बैंक अपनी व्यावसायिक रणनीति के अनुसार ब्याज दरों में सीमित बदलाव कर सकते हैं, लेकिन RBI के फैसले के बाद पूरे बैंकिंग सेक्टर में बड़े स्तर पर सस्ती दरों की संभावना फिलहाल नजर नहीं आ रही है। नए लोन लेने वाले ग्राहकों को भी मौजूदा ब्याज दरों पर ही कर्ज मिलने की संभावना है।
महंगाई और वैश्विक हालात बने चिंता की वजह
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर लगातार बदलते आर्थिक हालात, भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव महंगाई के लिए जोखिम पैदा कर रहे हैं। कई देशों में आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर दिखाई दे रहा है। ऐसे माहौल में जल्दबाजी में ब्याज दरों में कटौती करना उचित नहीं माना गया। उन्होंने यह भी कहा कि घरेलू स्तर पर महंगाई पहले की तुलना में नियंत्रण में है, लेकिन भविष्य के जोखिमों को देखते हुए सतर्क नीति अपनाना जरूरी है। RBI आगे भी महंगाई और आर्थिक गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखेगा।
अर्थव्यवस्था और बैंकिंग सेक्टर पर असर
केंद्रीय बैंक का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत स्थिति में है और विकास दर संतोषजनक बनी हुई है। हालांकि वैश्विक बाजारों में जारी अस्थिरता, कच्चे तेल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी और मौसम से जुड़े जोखिम भविष्य में महंगाई बढ़ा सकते हैं। ऐसे में RBI का उद्देश्य महंगाई को नियंत्रित रखते हुए आर्थिक विकास की रफ्तार को भी बनाए रखना है। रेपो रेट को स्थिर रखने से बैंकिंग सेक्टर में फिलहाल स्थिरता बनी रहेगी और वित्तीय बाजारों को भी स्पष्ट संकेत मिलेगा कि केंद्रीय बैंक फिलहाल जोखिम उठाने के बजाय संतुलित नीति पर आगे बढ़ना चाहता है।
आम लोगों के लिए क्या है संदेश?
इस फैसले का सीधा मतलब है कि फिलहाल लोन सस्ते होने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन लेने वाले ग्राहकों की EMI में तत्काल कोई बदलाव नहीं होगा। वहीं फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाले ब्याज में भी बड़े बदलाव की संभावना कम है। जिन लोगों ने भविष्य में लोन लेने की योजना बनाई है, उन्हें मौजूदा ब्याज दरों के हिसाब से अपनी वित्तीय योजना बनानी होगी। अब बाजार और ग्राहकों की नजर RBI की अगली मौद्रिक नीति समीक्षा पर रहेगी, जहां महंगाई, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और घरेलू विकास दर को ध्यान में रखते हुए ब्याज दरों पर अगला फैसला लिया जाएगा।
