Sea Exploration: देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और विदेशी तेल-गैस पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार ने ‘समुद्र मंथन’ यानी नेशनल ऑफशोर एक्सप्लोरेशन स्कीम को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत करीब 84,084 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका मकसद भारत के समुद्री क्षेत्रों, खासकर गहरे और अति-गहरे समुद्र में छिपे तेल और प्राकृतिक गैस के भंडारों की खोज करना है। सरकार का मानना है कि यदि देश के समुद्री क्षेत्रों में बड़े भंडार मिलते हैं तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।
तेल के नए कुएं कैसे खोजे जाते हैं?
समुद्र में तेल और गैस की खोज आसान प्रक्रिया नहीं होती। सबसे पहले वैज्ञानिक सिस्मिक सर्वे करते हैं, जिसमें ध्वनि तरंगों के जरिए समुद्र की सतह के नीचे मौजूद चट्टानों की संरचना का पता लगाया जाता है। यदि किसी क्षेत्र में तेल या गैस होने की संभावना दिखाई देती है तो वहां खोजी कुआं (Exploratory Well) खोदा जाता है। इसके लिए अत्याधुनिक ड्रिलिंग जहाज और रिग का इस्तेमाल होता है। ड्रिलिंग के दौरान निकले नमूनों की जांच के बाद तय किया जाता है कि वहां व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन संभव है या नहीं।
इतना महंगा क्यों होता है यह काम?
गहरे समुद्र में ड्रिलिंग दुनिया की सबसे महंगी औद्योगिक प्रक्रियाओं में मानी जाती है। कई बार समुद्र की गहराई हजारों मीटर होती है और उसके नीचे भी कई किलोमीटर तक ड्रिलिंग करनी पड़ती है। खराब मौसम, समुद्री दबाव, आधुनिक तकनीक और विशेष उपकरणों की जरूरत के कारण एक खोजी कुएं पर ही हजारों करोड़ रुपये तक का खर्च आ सकता है। यही वजह है कि सरकार निजी और विदेशी कंपनियों को भी इस क्षेत्र में निवेश के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
देश को क्या होगा फायदा?
यदि इस योजना के जरिए नए तेल और गैस भंडार मिलते हैं तो भारत की आयात पर निर्भरता कम होगी। इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और उद्योगों को स्थिर ईंधन आपूर्ति मिल सकेगी। साथ ही समुद्री ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, नई तकनीक आएगी और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। सरकार का लक्ष्य घरेलू उत्पादन बढ़ाकर भविष्य में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम उठाना है।
आगे की रणनीति क्या है?
सरकार इस योजना के तहत नए ऑफशोर ब्लॉकों की खोज, आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल और वैश्विक ऊर्जा कंपनियों की भागीदारी पर जोर दे रही है। आने वाले वर्षों में गहरे समुद्र में बड़े पैमाने पर सर्वे और ड्रिलिंग अभियान चलाए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खोज सफल रहती है तो भारत का ऊर्जा क्षेत्र नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है और लंबे समय में पेट्रोलियम आयात पर होने वाला भारी खर्च भी कम किया जा सकेगा।
