Sugar Price Hike: दीपावली से पहले महंगाई ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। त्योहार पर मिठाइयां और पकवान बनाने की तैयारी कर रहे लोगों को अब चीनी के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। देश में चीनी की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। पिछले एक महीने में चीनी के दाम 4 रुपये प्रति किलो से ज्यादा बढ़ चुके हैं। वहीं, बीते एक साल में इसकी कीमतों में करीब 12 से 13 रुपये प्रति किलो का इजाफा हुआ है।
त्योहार ने बढ़ाई मांग
8 नवंबर 2026 को दीपावली मनाई जाएगी। त्योहार से ठीक पहले चीनी की कीमतों में तेजी आने से घरेलू बजट पर दबाव बढ़ सकता है। दरअसल, दीपावली के दौरान मिठाइयों और दूसरे पकवानों की मांग बढ़ जाती है। इससे बाजार में चीनी की खपत भी बढ़ती है। दूसरी तरफ बाजार में पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने के कारण कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है।
खुदरा भाव 59.50 रुपये
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश में चीनी का औसत खुदरा भाव बढ़कर 59.50 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। वहीं, थोक बाजार में इसकी औसत कीमत 55.40 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई है। खुदरा और थोक दोनों बाजारों में कीमतें बढ़ने से आम उपभोक्ताओं को राहत मिलती नहीं दिख रही है।
एक साल में बड़ा उछाल
चीनी की कीमतों में पिछले एक साल के दौरान भी लगातार तेजी आई है। एक साल पहले खुदरा बाजार में चीनी का औसत भाव 46.50 रुपये प्रति किलो था। वहीं, थोक बाजार में इसकी कीमत 43.23 रुपये प्रति किलो थी। मौजूदा कीमतों से तुलना करें तो एक साल में खुदरा भाव करीब 13 रुपये और थोक भाव लगभग 12 रुपये प्रति किलो बढ़ चुका है।
इन शहरों में महंगी चीनी
3 नवंबर को देश के प्रमुख शहरों में चीनी की कीमतों में काफी अंतर देखने को मिला। कोलकाता में चीनी सबसे महंगी रही, जहां इसका भाव 65 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया। इसके अलावा दिल्ली में 64 रुपये और मुंबई में 61 रुपये प्रति किलो कीमत रही।
एक साल पहले कोलकाता में चीनी 50 रुपये किलो मिल रही थी। वहीं, दिल्ली में इसका भाव 46 रुपये और मुंबई में 45 रुपये प्रति किलो था। इससे साफ है कि बड़े शहरों में भी चीनी की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है।
उत्पादन में आई कमी
चीनी की कीमतें बढ़ने की एक बड़ी वजह इस साल उत्पादन में आई कमी बताई जा रही है। पिछले सीजन की तुलना में कम उत्पादन होने से बाजार में इसकी उपलब्धता प्रभावित हुई है। इसके अलावा मौसम में बदलाव और गन्ने की फसल में बीमारियों के कारण पैदावार पर भी असर पड़ा है। जब बाजार में उपलब्धता कम होती है और मांग बढ़ती है, तो कीमतों पर दबाव बढ़ने लगता है।
अंतरराष्ट्रीय हालात का असर
देश के अलावा दुनिया के कई हिस्सों में भी चीनी की उपलब्धता कम होने से कीमतों पर दबाव बना हुआ है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को भी इसके पीछे एक वजह बताया जा रहा है। वहीं, कुछ कारोबारियों की ओर से चीनी का स्टॉक जमा करके रखने के कारण बाजार में इसकी आपूर्ति प्रभावित होने की बात सामने आई है।
सरकार के प्रयास नाकाम
बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। चीनी कारोबारियों के स्टॉक की सीमा तय करने के साथ बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए आयात की अनुमति भी दी गई। इसके अलावा चीनी के भंडार और कीमतों की निगरानी बढ़ाई गई। चीनी मिलों में गन्ने की पेराई भी जल्दी शुरू कराई गई, लेकिन इन उपायों के बावजूद कीमतों में गिरावट नहीं आई है। ऐसे में दीपावली से पहले चीनी की महंगाई ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

