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नासा और स्पेसएक्स ने क्रू-10 मिशन किया लॉन्च कब होगी सुनीता और बुच विल्मोर की पृथ्वी पर वापसी

Sunita Williams return to Earth: भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विल्मोर की धरती पर सुरक्षित वापसी की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नौ महीने से अंतरिक्ष में मौजूद ये दोनों यात्री जल्द ही अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से रवाना होंगे।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने जानकारी दी है कि 19 मार्च से पहले दोनों की वापसी तय मानी जा रही है। इसके लिए नासा और स्पेसएक्स ने मिलकर क्रू-10 मिशन लॉन्च किया है।

तकनीकी खराबी से पहले टल चुका है मिशन

गुरुवार को उनकी वापसी का मिशन लॉन्च होने वाला था, लेकिन ऐन वक्त पर इसे रोकना पड़ा। नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरने से करीब एक घंटे पहले क्रू-10 मिशन को स्थगित कर दिया गया।

इसके पीछे फाल्कन 9 रॉकेट के ग्राउंड सपोर्ट क्लैंप आर्म में आई हाइड्रॉलिक सिस्टम की समस्या को वजह बताया गया। अब इस समस्या को दूर करने के बाद दोबारा लॉन्चिंग की गई है।

सुनीता विलियम्स किस मिशन पर थीं?

5 जून 2024 को नासा ने बोइंग क्रू फ्लाइट टेस्ट मिशन लॉन्च किया था। इस मिशन के तहत सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को आठ दिन के लिए अंतरिक्ष में भेजा गया था।

उन्हें स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान के जरिए ISS तक पहुंचाया गया, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण यह यान उन्हें वापस लाने में असमर्थ रहा। इस वजह से वे पिछले नौ महीनों से अंतरिक्ष में फंसे हुए हैं।

नासा और स्पेसएक्स का संयुक्त मिशन

नासा का उद्देश्य है कि अमेरिका के निजी अंतरिक्ष उद्योग के साथ मिलकर कम लागत में विश्वसनीय मानव मिशन संचालित किए जाएं। इसी उद्देश्य से स्पेसएक्स और नासा ने मिलकर क्रू-10 मिशन लॉन्च किया है, जिसके जरिए सुनीता और विल्मोर को वापस लाया जा रहा है।

इस मिशन में फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए ड्रैगन अंतरिक्ष यान को भेजा गया है, जो दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित पृथ्वी तक लाने का काम करेगा।

जल्द पूरी होगी वापसी

नासा ने अपने आधिकारिक X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर जानकारी दी कि क्रू-10 मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च हो चुका है। अब कुछ दिनों में सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर के पृथ्वी पर लौटने की उम्मीद है।

अंतरिक्ष में इतने महीनों तक रहने के बाद दोनों की वापसी को लेकर वैज्ञानिकों की नजर इस मिशन पर टिकी हुई है। अगर यह सफल होता है, तो यह भविष्य में अंतरिक्ष यात्राओं के लिए एक बड़ी सफलता मानी जाएगी।

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