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Airfare Hearing: दिवाली-छठ पर आसमान छूते टिकट के दाम, सुप्रीम कोर्ट में एयरफेयर पर सुनवाई

अगर आपने कभी दिवाली, छठ या किसी जरूरी काम से अचानक फ्लाइट टिकट बुक की है, तो किराया देखकर झटका जरूर लगा होगा। सामान्य दिनों में 4,000 से 5,000 रुपए में मिलने वाली टिकट त्योहारों के आसपास 15,000 से 20,000 रुपए तक पहुंच जाती है। यानी कुछ ही दिनों में किराया तीन से चार गुना तक बढ़ जाता है। परिवार में कोई जरूरी काम हो या मेडिकल इमरजेंसी, ऐसी स्थिति में लोगों को मजबूरी में महंगी टिकट खरीदनी पड़ती है।

मांग बढ़ते ही किराया

फ्लाइट टिकट की कीमतें तय करने के लिए एयरलाइंस डायनेमिक प्राइसिंग सिस्टम का इस्तेमाल करती हैं। इसमें मांग बढ़ने के साथ टिकट की कीमत भी बढ़ती जाती है। त्योहारों, छुट्टियों और बड़े आयोजनों के दौरान बड़ी संख्या में लोग एक साथ यात्रा करते हैं। ऐसे समय में सीमित सीटों की वजह से किराए में तेजी आ जाती है। यात्रियों का कहना है कि कई बार कुछ घंटों के अंदर ही एक ही फ्लाइट की टिकट की कीमत में हजारों रुपए का अंतर दिखाई देता है।

कोर्ट ने जताई चिंता

एयरफेयर में इस तरह की बढ़ोतरी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। अदालत ने त्योहारों और ज्यादा मांग वाले समय में टिकट की कीमतों में होने वाली भारी वृद्धि पर चिंता जताई है। सुनवाई के दौरान महाकुंभ जैसे बड़े आयोजनों के समय फ्लाइट किराए में हुई बढ़ोतरी का भी जिक्र किया गया। कोर्ट का मानना है कि यात्रियों को जरूरी यात्रा के लिए अत्यधिक कीमत चुकाने की स्थिति में नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

केंद्र से मांगी जानकारी

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से एयरफेयर को लेकर तैयार किए जा रहे नियमों की जानकारी मांगी है। सरकार की तरफ से बताया गया है कि एयर टिकट की कीमत, सर्ज प्राइसिंग, बैगेज चार्ज, कैंसिलेशन और रिफंड जैसे मामलों को लेकर नियम तैयार किए जा रहे हैं। अदालत यह देखना चाहती है कि यात्रियों के हितों की रक्षा के साथ एयरलाइंस की कीमत तय करने की व्यवस्था में पारदर्शिता कैसे लाई जा सकती है।

यात्रियों को राहत उम्मीद

अगर एयरफेयर को लेकर नए नियम लागू होते हैं, तो इसका सीधा फायदा यात्रियों को मिल सकता है। खासकर त्योहारों और इमरजेंसी के दौरान टिकट की कीमतों में अचानक होने वाली बढ़ोतरी पर नियंत्रण की उम्मीद है। हालांकि एयरलाइंस के लिए भी ऐसा सिस्टम जरूरी होगा, जिससे उन्हें कारोबार में नुकसान न हो और यात्रियों से मनमाना किराया वसूलने की स्थिति भी न बने। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई और केंद्र सरकार के प्रस्तावित नियमों पर है।

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