Car Number Plate Rule: सुप्रीम कोर्ट ने वाहन चालकों के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि केवल गाड़ी की नंबर प्लेट छिपा देना अपने आप में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में अधिकतम कार्रवाई मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (Motor Vehicles Act) के तहत की जा सकती है, लेकिन इसे बिना पर्याप्त आधार के आपराधिक धोखाधड़ी नहीं कहा जा सकता।
क्या था पूरा मामला?
मामला तेलंगाना के निवासी मोहम्मद अब्दुल अहद शाकेर से जुड़ा है। 5 जून 2020 को वह स्कूटी चला रहे थे, जिसकी पिछली नंबर प्लेट काले मास्क से ढकी हुई थी। पेट्रोलिंग कर रहे पुलिसकर्मी ने उन्हें रोककर आरोप लगाया कि वह ट्रैफिक चालान से बचने के लिए नंबर प्लेट छिपा रहे हैं। इसके बाद उनके खिलाफ IPC की धारा 420 और मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 80(ए) के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत
एफआईआर रद्द कराने के लिए शाकेर ने तेलंगाना हाईकोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन अदालत ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने पाया कि वाहन की केवल पिछली नंबर प्लेट ढकी हुई थी, जबकि सामने की नंबर प्लेट पूरी तरह स्पष्ट और पढ़ने योग्य थी। अदालत ने कहा कि इसे पहचान छिपाने का स्पष्ट प्रयास नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि धोखाधड़ी साबित करने के लिए बेईमानी की नीयत, किसी व्यक्ति को धोखे में रखकर प्रेरित करना और संपत्ति या आर्थिक नुकसान होना आवश्यक है। केवल नंबर प्लेट ढकने से ये सभी तत्व स्वतः सिद्ध नहीं होते।
वाहन चालकों के लिए क्या है संदेश?
सुप्रीम कोर्ट ने यह जरूर माना कि नंबर प्लेट छिपाना मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन हो सकता है और इसके लिए जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, बिना पर्याप्त कानूनी आधार के ऐसे मामलों में IPC की धारा 420 लगाना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसलिए वाहन चालकों को हमेशा स्पष्ट और नियमों के अनुरूप नंबर प्लेट का इस्तेमाल करना चाहिए।
