Yellow Pea Import Case: सुप्रीम कोर्ट में पीली मटर के ड्यूटी फ्री आयात से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान किसानों की स्थिति को लेकर गंभीर बहस हुई। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत के सामने किसानों की आर्थिक परेशानियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि अगर विदेशी दालों का आयात इसी तरह जारी रहा और किसानों को उनकी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी नहीं मिला, तो छोटे किसान आर्थिक रूप से टूट जाएंगे। उनके सामने जीवन यापन का संकट खड़ा हो सकता है।
भूषण की इस दलील को सुनकर अदालत ने भी मामले को गंभीरता से लिया।
चीफ जस्टिस ने सरकार को दी नसीहत
मामले की सुनवाई कर रहे चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने केंद्र सरकार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब अस्थायी उपायों या “जुगाड़” वाली नीति से काम नहीं चलेगा। उन्होंने सरकार से कहा कि सभी संबंधित पक्षों के साथ तुरंत बैठक की जाए और एक ठोस तथा लंबी अवधि की नीति तैयार की जाए। अदालत का मानना है कि किसानों की सुरक्षा और कृषि बाजार को स्थिर रखने के लिए सरकार को स्पष्ट रणनीति बनानी होगी।
धान-गेहूं के चक्र से बाहर लाने पर जोर
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अब समय आ गया है जब किसानों को सिर्फ धान और गेहूं की खेती तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
अदालत ने सुझाव दिया कि देश में दालों की खेती को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। खासकर उत्तर और मध्य भारत में किसानों को दालों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। हालांकि अदालत ने यह भी साफ कहा कि अगर किसानों को नई फसल उगाने के लिए प्रेरित करना है, तो उन्हें सरकार की ओर से मजबूत सुरक्षा और भरोसेमंद बाजार भी देना होगा।
अदालत में हुई तीखी बहस
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दलील दी गई कि देश में दालों की कमी को देखते हुए आयात जरूरी था। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि गरीब उपभोक्ताओं के हितों का ध्यान रखना जरूरी है, लेकिन यह स्थानीय किसानों की कीमत पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश में धान का उत्पादन जरूरत से ज्यादा हो रहा है, तो उसी जमीन का उपयोग दालों की खेती के लिए क्यों नहीं किया जा रहा।
अदालत ने यह भी कहा कि सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों को आपसी मतभेद छोड़कर कृषि मंत्रालय के साथ मिलकर काम करना चाहिए।
किसानों को चाहिए सुरक्षित बाजार
चीफ जस्टिस ने स्पष्ट किया कि किसानों को दालों की खेती के लिए प्रेरित करने के लिए एमएसपी आधारित एक भरोसेमंद खरीद व्यवस्था जरूरी है। अगर किसानों को यह भरोसा होगा कि उनकी फसल उचित कीमत पर बिकेगी, तभी वे नई फसलों की खेती करने के लिए तैयार होंगे। अदालत ने सरकार से कहा कि किसानों, व्यापारियों और विशेषज्ञों सहित सभी पक्षों से बातचीत कर नई नीति बनाई जाए ताकि कृषि व्यवस्था संतुलित बनी रहे।
