Autism Awareness: ऑटिज्म को एक बीमारी के बजाय मस्तिष्क के विकास के एक विशिष्ट तरीके के रूप में देखना जरूरी है। मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के डॉ. अमिताभ साहा के अनुसार, वर्तमान में वर्चुअल मीडिया का बढ़ता प्रभाव बच्चों के सामाजिक व्यवहार और आपसी मेलजोल के तरीकों को प्रभावित कर रहा है। ऑटिस्टिक बच्चों के लिए दुनिया को उनकी जरूरतों के अनुसार ढालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन सही सपोर्ट से उनके जीवन को सुगम बनाया जा सकता है।
नियमित रूटीन और स्पष्ट संवाद
ऑटिस्टिक बच्चों के लिए एक निश्चित दिनचर्या (Routine) सुरक्षा का अहसास कराती है। जब उन्हें पता होता है कि पढ़ाई, खेल और सोने का समय कब है, तो उनका डर कम होता है। इसके लिए माता-पिता विजुअल चार्ट या तस्वीरों का सहारा ले सकते हैं। बातचीत के दौरान सरल वाक्यों का प्रयोग करें और याद रखें कि हर बच्चा बोलकर अपनी बात नहीं कहता; कई बच्चे इशारों या साइन लैंग्वेज का उपयोग करते हैं। उन्हें अपनी बात समझाने के लिए पर्याप्त समय देना अनिवार्य है।
सकारात्मक प्रोत्साहन
कई बच्चों को तेज आवाज, चमकदार रोशनी या विशिष्ट कपड़ों से परेशानी हो सकती है। उनके लिए शांत वातावरण और सेंसरी ब्रेक (जैसे गहरी सांस लेना) की व्यवस्था करें। जब बच्चा कोई अच्छा काम करे, तो उसकी तुरंत तारीफ करें। सजा देने के बजाय प्रोत्साहन का रास्ता चुनें, क्योंकि सजा से उनमें घबराहट और व्यवहारिक समस्याएं बढ़ सकती हैं।
नींद, पोषण और सामाजिक कौशल
सीखने की क्षमता के लिए बेहतर नींद जरूरी है, इसलिए शाम के समय स्क्रीन (मोबाइल/टीवी) से दूरी बनाएं। खान-पान में नई चीजों को धीरे-धीरे शामिल करें। सामाजिक विकास के लिए उन्हें सीधे बड़े समूहों के बजाय छोटे और शांत ग्रुप में खेलने का मौका दें, जहाँ वे धैर्यवान साथियों के साथ बेहतर सोशल स्किल सीख सकें।
विशेषज्ञों की सलाह और अभिभावकों का स्वास्थ्य
स्पीच थेरेपिस्ट और बिहेवियर स्पेशलिस्ट के साथ मिलकर काम करना बच्चे के भविष्य के लिए लाभकारी होता है। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में माता-पिता को अपने मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए। देखभाल करने वालों का स्वस्थ और तनावमुक्त होना बच्चे की प्रगति के लिए सबसे महत्वपूर्ण आधार है।








