RTI Exposes Fraud: 33 साल तक दो सरकारी नौकरियां करने वाला दोषी करार , कैसे खुली पोल, कितनी मिली सजा

उत्तर प्रदेश में एक व्यक्ति द्वारा फर्जी दस्तावेजों के जरिए दो सरकारी विभागों में वर्षों तक नौकरी करने का मामला सामने आया। आरटीआई से खुलासा होने के बाद अदालत ने आरोपी को सात साल की सजा और जुर्माना लगाया।

Two Government Jobs: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति ने फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर दो अलग-अलग सरकारी विभागों में एक साथ नौकरी कर ली। चौंकाने वाली बात यह है कि वह करीब 33 साल तक दोनों जगहों से वेतन और सुविधाएं लेता रहा।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब किसी ने सूचना के अधिकार यानी आरटीआई के तहत जानकारी मांगी। आरटीआई से मिली जानकारी के बाद जांच शुरू हुई और धीरे-धीरे पूरी सच्चाई सामने आ गई। मामला अदालत तक पहुंचा, जहां सुनवाई के बाद आरोपी को दोषी करार दिया गया।

शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 20 फरवरी 2009 को बाराबंकी शहर की आवास विकास कॉलोनी में रहने वाले प्रभात सिंह ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में बताया गया कि सतरिख थाना क्षेत्र के नरौली गांव के रहने वाले जयप्रकाश सिंह ने फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कराकर धोखाधड़ी के जरिए दो अलग-अलग सरकारी विभागों में नौकरी हासिल कर ली।
शिकायत मिलने के बाद मामले की जानकारी जुटाई गई। इसी दौरान आरटीआई से मिले दस्तावेजों ने कई अहम राज खोल दिए। जांच में सामने आया कि आरोपी लंबे समय से दोनों जगह नौकरी कर रहा था और दोनों विभागों से वेतन भी ले रहा था।

दो विभागों से लेते रहे वेतन

जांच में पता चला कि जयप्रकाश सिंह की नियुक्ति जून 1993 में बाराबंकी जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक के पद पर हुई थी।
लेकिन इससे पहले ही उन्हें 26 दिसंबर 1979 को प्रतापगढ़ जिले में नॉन मेडिकल असिस्टेंट के पद पर नियुक्ति मिल चुकी थी। आरोप है कि उन्होंने दोनों पदों पर एक साथ काम किया और सालों तक दोनों विभागों से वेतन और दूसरी सुविधाएं लेते रहे। यह मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी काफी हलचल मच गई थी।

अदालत ने सुनाई सात साल की सजा

पूरी जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने से जुड़े मामलों में मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई दस्तावेजी सबूत और गवाह अदालत के सामने पेश किए। इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना। सभी तथ्यों और दलीलों को सुनने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधा सिंह की अदालत ने जयप्रकाश सिंह को सात साल की सजा सुनाई। इसके साथ ही उस पर 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

यह फैसला सरकारी नौकरी में फर्जीवाड़े के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।

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