Massive Layoffs at Washington Post: दुनिया के प्रतिष्ठित अख़बार Washington Post ने अपनी कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग को काफी हद तक कम कर दिया है। इसके साथ ही, अख़बार ने अपनी मौजूदा स्पोर्ट्स डेस्क को पूरी तरह बंद करने का फैसला भी लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फैसले का सीधा असर कर्मचारियों पर पड़ा है और कंपनी के लगभग एक-तिहाई कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। यह कदम न सिर्फ संस्थान के भीतर, बल्कि पूरे वैश्विक मीडिया जगत में चिंता का कारण बन गया है।
ईशान थरूर समेत कई वरिष्ठ पत्रकार प्रभावित
इस छंटनी में कई जाने-माने और अनुभवी पत्रकारों के नाम सामने आए हैं। इनमें ईशान थरूर भी शामिल हैं, जो कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और वॉशिंगटन पोस्ट के वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं। ईशान ने सोशल मीडिया पर खाली न्यूज़रूम की तस्वीर साझा करते हुए इसे अपने करियर का “एक बुरा दिन” बताया। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन पोस्ट के साथ उनके 12 साल का सफर बेहद खास और सीख से भरा रहा।
ईशान ने 2017 से ‘वर्ल्डव्यू’ कॉलम के ज़रिए दुनिया भर के लाखों पाठकों से जुड़ने को अपने जीवन का सम्मान बताया। उनके लिए यह सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी और गर्व की बात थी।
यरुशलम से दिल्ली तक असर
छंटनी की मार केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रही। पोस्ट के यरुशलम ब्यूरो चीफ गेरी शिह ने भी अपने दर्द को शब्दों में बयां किया। उन्होंने बताया कि उनके साथ पूरी मिडिल ईस्ट टीम को हटा दिया गया है। खोजी पत्रकार विल हॉब्सन ने लिखा कि पोस्ट में 11 साल का उनका सफर किसी सपने से कम नहीं था। खेल जगत में ताकतवर लोगों को जवाबदेह बनाना उनके करियर का सबसे बड़ा अनुभव रहा।
पत्रकारिता जगत में मायूसी
दिल्ली, बीजिंग, कीव और लैटिन अमेरिका जैसे अहम केंद्रों पर तैनात कई अंतरराष्ट्रीय संवाददाताओं की भी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। काहिरा, यूक्रेन और बर्लिन के ब्यूरो प्रमुखों ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह फैसला अचानक और भावनात्मक रूप से झकझोर देने वाला है। नौकरी से निकाले गए पत्रकारों ने दुख के साथ-साथ गर्व भी जताया कि उन्हें इतने बड़े और भरोसेमंद संस्थान के लिए काम करने का मौका मिला। यह छंटनी एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि बदलते दौर में पत्रकारों की नौकरी कितनी सुरक्षित है।
