Women Reservation Bill: महिला आरक्षण बिल को लेकर संसद में जोरदार बहस चल रही है। सरकार 2029 से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव लेकर आई है। इसके लिए तीन अहम संशोधन विधेयक पेश किए गए हैं। लेकिन इस मुद्दे पर विपक्ष ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है, जिससे माहौल गरमा गया है।
सरकार ने पेश किए बड़े बिल
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान संशोधन बिल और डिलिमिटेशन बिल 2026 पेश किया। वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश से जुड़ा संशोधन विधेयक सदन में रखा। इन बिलों को लेकर सरकार का कहना है कि यह महिलाओं को आगे बढ़ाने और लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने इन विधेयकों का विरोध किया है। सपा का कहना है कि सरकार परिसीमन को जनगणना से अलग कर रही है, जो सही नहीं है। वहीं, कांग्रेस ने इन बिलों को चालाकी भरा कदम बताते हुए गहन चर्चा की मांग की है।
ओवैसी और DMK का विरोध
AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने डिलिमिटेशन बिल को संघीय ढांचे के खिलाफ बताया। उनका कहना है कि इससे कुछ राज्यों को ज्यादा ताकत मिल सकती है और अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। वहीं, DMK के टीआर बालू ने भी इस बिल का विरोध करते हुए अपनी पार्टी का रुख साफ किया।
अखिलेश और अमित शाह में बहस
संसद में अखिलेश यादव और अमित शाह के बीच तीखी बहस देखने को मिली। अमित शाह ने साफ कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के खिलाफ है। इस पर अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि क्या मुस्लिम महिलाएं आरक्षण की हकदार नहीं हैं। दोनों नेताओं के बीच इस मुद्दे पर काफी देर तक बहस चली।
वोटिंग और चर्चा का समय तय
सरकार ने इन तीनों बिलों पर 12 घंटे चर्चा का प्रस्ताव रखा है। साथ ही, मंगलवार शाम 4 बजे वोटिंग कराने का फैसला किया गया है। हालांकि विपक्ष ने इस समय को कम बताते हुए ज्यादा चर्चा की मांग की है।
राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित
इस पूरे मुद्दे के बीच राज्यसभा की कार्यवाही को शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। अब अगली बैठक 17 अप्रैल 2026 को सुबह 11 बजे होगी।
राजनीतिक माहौल और गरमाया
इस मुद्दे ने पूरे देश की राजनीति को गर्म कर दिया है। सत्ता पक्ष इसे ऐतिहासिक कदम बता रहा है, तो विपक्ष इसे राजनीतिक चाल मान रहा है। आने वाले समय में यह बहस और तेज हो सकती है।
