Aaryam Guru Purnima: नोएडा में आर्यम गुरु पूर्णिमा महोत्सव 2026 भव्य आयोजन, 300 से अधिक शिष्यों ने लिया गुरु कृपा का आशीर्वाद

नोएडा में आयोजित आर्यम गुरु पूर्णिमा महोत्सव 2026 में 300 से अधिक शिष्यों ने भाग लिया। 35 को नव दीक्षा, 25 को मंत्र दीक्षा और 110 साधकों को शक्तिपात प्रदान किया गया।

Aaryam Guru Purnima Mahotsav 2026

Aaryam Guru Purnima: नोएडा के फॉर्च्यून इन ग्रेज़िया में आर्यम इंटरनेशनल फाउंडेशन द्वारा आयोजित आर्यम गुरु पूर्णिमा महोत्सव 2026 आध्यात्मिक वातावरण और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से 300 से अधिक शिष्यों ने भाग लिया और परमपूज्य जगद्गुरु प्रोफेसर पुष्पेंद्र कुमार आर्यम जी महाराज के सानिध्य में गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया। इस अवसर पर 35 शिष्यों को नव दीक्षा, 25 को मंत्र दीक्षा तथा 110 साधकों को शक्तिपात प्रदान किया गया।

गुरुदेव का संदेश

अपने संबोधन में गुरुदेव प्रोफेसर पुष्पेंद्र कुमार आर्यम जी महाराज ने कहा कि गुरु का कार्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि शिष्य की दृष्टि को भीतर की ओर मोड़ना भी है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य स्वयं को पहचानने की यात्रा शुरू करता है, तभी उसके जीवन में वास्तविक परिवर्तन आता है। उनके अनुसार गुरु का सानिध्य व्यक्ति को शाश्वत सत्य की अनुभूति कराता है और आत्मिक विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।

पुष्पार्चन और आध्यात्मिक वातावरण

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर कमल, गुलाब और गेंदे के हजारों पुष्पों से गुरुदेव का भव्य पुष्पार्चन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, प्रार्थनाओं और आध्यात्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं ने गुरु के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। आयोजन के दौरान गुरु-शिष्य परंपरा, संस्कार और आध्यात्मिक साधना के महत्व पर भी विशेष प्रकाश डाला गया।

दीक्षा का महत्व बताया

गुरुदेव ने कहा कि शिक्षा मनुष्य की बुद्धि को विकसित करती है, जबकि दीक्षा आत्मा को जागृत करती है। उन्होंने बताया कि केवल ज्ञान पर्याप्त नहीं होता, बल्कि आत्मचेतना का जागरण ही जीवन को सार्थक बनाता है। उनके अनुसार दीक्षा व्यक्ति को सजगता, आत्मबोध और ईश्वर की कृपा की ओर अग्रसर करती है, जिससे जीवन में स्थायी परिवर्तन संभव होता है।

देश-विदेश में शिष्य

आर्यम इंटरनेशनल फाउंडेशन की अधिशासी प्रवक्ता माँ यामिनी श्री ने बताया कि गुरुदेव के दीक्षित शिष्य भारत के साथ-साथ कई देशों में सनातन संस्कृति और वैदिक परंपराओं का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुरुदेव की शिक्षाओं और वैदिक पूजा-पद्धतियों से प्रेरित होकर लाखों साधक आध्यात्मिक जीवन की ओर अग्रसर हैं। कार्यक्रम का समापन गुरुदेव के आशीर्वचन और सभी शिष्यों के इस संकल्प के साथ हुआ कि वे जीवनभर गुरु द्वारा बताए गए मार्ग पर चलकर समाज और संस्कृति की सेवा करेंगे।

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