20 साल पुराने निठारी कांड की कहानी सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत के बाद एक बार फिर चर्चा में है। निठारी मामले में आरोपी रहे कोली को नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी बचे मामले में भी बरी कर दिया था। इसके करीब 10 महीने बाद 18 सितंबर 2026 को वह हरिद्वार में एक चाय की दुकान में मृत मिले। पुलिस ने शुरुआती तौर पर इसे आत्महत्या बताया है, हालांकि मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला और जांच जारी है।
निठारी कांड कैसे खुला
29 दिसंबर 2006 को नोएडा के निठारी इलाके में एक मकान के पीछे नाले से मानव अवशेष मिलने के बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई थी। यह मकान कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर का था और सुरेंद्र कोली वहां घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था। बच्चों और युवतियों के लापता होने से जुड़ी जांच आगे बढ़ी तो मामला देश के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल हो गया।
कोली पर क्या आरोप थे
जांच के बाद कोली और पंढेर पर हत्या, दुष्कर्म और सबूत मिटाने समेत कई मामलों में मुकदमे चले। कोली को अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराकर मौत की सजा भी सुनाई गई थी। बाद में अदालतों में इन मामलों की तस्वीर बदलती गई और कई मामलों में उसे बरी कर दिया गया।
जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने कोली और पंढेर की 12 मामलों में बरी किए जाने की चुनौती वाली अपीलें खारिज कर दी थीं। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी लंबित मामले में भी कोली की दोषसिद्धि रद्द कर उसे बरी कर दिया और रिहाई का आदेश दिया।
हरिद्वार में मिली लाश
जेल से बाहर आने के बाद कोली हरिद्वार में रहने लगा था और चाय की दुकान चला रहा था। 18 सितंबर को उसका शव उसी दुकान में मिला। पुलिस के मुताबिक उसके गले में फंदा था, लेकिन कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। पोस्टमार्टम और जांच के बाद मौत की परिस्थितियां स्पष्ट होने की बात कही गई है।
पीड़ित पिता ने उठाए सवाल
निठारी कांड में अपनी 10 साल की बेटी ज्योति को खोने वाले झब्बू लाल ने कोली की मौत को आत्महत्या मानने से इनकार किया है। उनका आरोप है कि कोली के पास मामले से जुड़े कई राज थे और उन्हीं लोगों ने उसे मारा हो सकता है, जिनके बारे में उसे जानकारी थी।
झब्बू लाल और उनकी पत्नी सुनीता देवी आज भी निठारी में कपड़े प्रेस करके गुजारा करते हैं। उनका कहना है कि बेटी को खोने के बाद न्याय की लड़ाई में उनकी जमीन-जायदाद तक चली गई, लेकिन उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला।
पत्नी ने बताया पुराना दावा
झब्बू लाल की पत्नी सुनीता देवी ने दावा किया कि निठारी कांड की जांच के दौरान कोली ने थाने में उनसे कहा था कि उनकी बेटी को गलती से मार दिया गया था। उनके मुताबिक, इस बातचीत की रिकॉर्डिंग भी हुई थी, लेकिन उसे अदालत में पेश नहीं किया गया।
ये सुनीता देवी के दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है। इसी तरह कोली की मौत को हत्या बताने का भी कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। पुलिस की शुरुआती जांच आत्महत्या की ओर इशारा करती है और अंतिम स्थिति जांच के बाद स्पष्ट होगी।
20 साल बाद भी सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में आखिरी मामले में कोली को बरी करते हुए कहा था कि अभियोजन पक्ष दोष साबित करने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार नहीं दे सका। अदालत के फैसले के बाद निठारी हत्याओं में वास्तविक अपराधी की पहचान को लेकर सवाल बना रहा।
कोली की मौत ने पीड़ित परिवारों के पुराने जख्म फिर खोल दिए हैं। उनके लिए सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि करीब दो दशक पहले निठारी में बच्चों और युवतियों की हत्याओं के पीछे आखिर कौन था और इन मामलों का पूरा सच कभी सामने आएगा या नहीं।

