Ali Ahmed: छोटे भाई अबान की मौत ने अतीक अहमद के बेटे अली अहमद और उमर को भावुक कर दिया। पुलिस की सुरक्षा में दोनों भाई प्रिजन वैन से कसारी-मसारी कब्रिस्तान पहुंचे। वैन में बैठे अली की आंखों में आंसू थे। नीचे उतरने के बाद उसने नमाज पढ़ी और भाई के जनाजे को कंधा दिया। इसके बाद उसने अबान को कब्र में मिट्टी भी दी।
Janaza में उमड़ी भीड़
अबान का शव कब्रिस्तान पहुंचने से पहले ही वहां बड़ी संख्या में लोग जुट चुके थे। कब्रिस्तान के करीब 500 मीटर पहले से ही वाहनों की लंबी कतार दिखाई दे रही थी। अंदर और बाहर मिलाकर करीब चार हजार लोगों की भीड़ मौजूद थी। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस और पीएसी के जवान लगातार लोगों को पीछे हटाते रहे। भीड़ अली और उमर के करीब पहुंचने की कोशिश कर रही थी, लेकिन सुरक्षाकर्मी उन्हें नियंत्रित करते रहे।
दोनों भाई हुए भावुक
कसारी-मसारी कब्रिस्तान में सबसे पहले उमर पहुंचा। उसके बाद अली को वहां लाया गया। अबान का शव आने तक दोनों भाई प्रिजन वैन में ही बैठे रहे। वे बार-बार वकीलों और रिश्तेदारों से अबान के बारे में जानकारी लेते रहे। जब एंबुलेंस से शव लाया गया तो दोनों भाई खुद को रोक नहीं पाए और फूट-फूटकर रोने लगे। दोनों को अलग-अलग प्रिजन वैन से उतारा गया था और उस समय उनके हाथों में हथकड़ी लगी हुई थी।
परिवार से की मुलाकात
अबान को दफनाने के बाद अली और उमर कब्रिस्तान में मस्जिद के बाहर लगाए गए टेंट में पहुंचे। यहां उन्होंने अपने छोटे भाई एहजम, फुफ्फी और परिवार के दूसरे लोगों से मुलाकात की। सभी ने मिलकर अबान की मौत का दुख साझा किया। इस दौरान परिवार की स्थिति और हादसे को लेकर भी बातचीत हुई। दोनों भाई करीब डेढ़ घंटे तक कब्रिस्तान में रुके। इस दौरान पुलिस और पीएसी के जवान पूरी तरह सतर्क रहे।
‘मैं वापस आऊंगा’
कब्रिस्तान से वापस जाने के समय अली का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला। जब उसे दोबारा प्रिजन वैन में बैठाया जा रहा था, तब उसने मूंछों पर ताव दिया और कहा, ‘मैं वापस आऊंगा…’। उसके चेहरे पर आत्मविश्वास नजर आ रहा था। इस दौरान उसने अपने भाई एहजम को भी भरोसा दिलाने की कोशिश की। अली और उमर करीब चार साल बाद पैरोल पर जेल से बाहर आए थे।
कड़ी रही सुरक्षा
अली और उमर को लेकर पुलिस की प्रिजन वैन लखनऊ और झांसी के लिए रवाना हुई तो कई गाड़ियां भी उनके पीछे चलने लगीं। इनमें कुछ गाड़ियों पर नंबर प्लेट नहीं होने की बात भी सामने आई। आते समय भी कई लग्जरी गाड़ियां उनके साथ चल रही थीं, जिनमें करीबी और समर्थक बताए गए। पूरे घटनाक्रम के दौरान खुफिया एजेंसियां भी अपने स्तर पर जानकारी जुटाती रहीं और पुलिस की नजर हर गतिविधि पर बनी रही।
