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आखिर क्यों महाकुंभ में साधुओं ने उठाई गैर- हिन्दुओं के प्रतिबन्ध की मांग? क्या मुसलमानों के साथ बैन होंगे सिख, इसाई, बौध और जैन?

Mahakumbh

Mahakumbh 2025:उत्तर प्रदेश के अमेठी से सगरा पीठाधीश्वर संतों ने महाकुंभ (Mahakumbh) में गैर सनातनियों के आने पर रोक लगाने की मांग की है। वह समय-समय पर हिंदुओं और धर्म के प्रति आवाज उठाते रहते हैं। उन्होंने एक बार फिर अपना बयान जारी किया है।उन्होंने कहा कि जब मक्का सिर्फ मुसलमान का है तो प्रयागराज हम सनातनियों का है वहां सिर्फ सनातनियों को ही इजाजत मिलनी चाहिए।सनातनियों को ही दुकान मिलनी चाहिए।सरकार को इसकी व्यवस्था करनी चाहिए

श्रद्धा और प्रेम होना अनिवार्य

संतों का मानना है के महाकुंभ (Mahakumbh) कोई साधारण मेला नहीं है यहाँ आने वाले हर व्यक्ति के मन में श्रद्धा और प्रेम की भावना होनी चाहिए इसी लिये संत गण चाहते कि वहां आने वाला हर व्यक्ति सनातनी हो हिंदू हो वह मां गंगा को माने राम को माने और सनातन धर्म को माने और मां गंगा में डुबकी लगाये वो भी पूरी श्रद्धा के साथ।

सरकार से समर्थन और सहयोग की मांग

संतों के बयान के समर्थन में मौनी महाराज ने वीडियो जारी करके महाकुंभ से पहले गैर सनातनियों को लेकर मांग उठाई है। मौनी महाराज ने कहा कि गैर सनातनियों का महाकुंभ में प्रवेश पूरी तरीके से प्रतिबंधित किया जाए। गौरीगंज के बाबूगंज सगरा पीठाधीश्वर मौनी महाराज समय-समय पर धर्म को लेकर आवाज उठाते रहते हैं। ऐसे में उन्होंने एक बार फिर वीडियो जारी कर महाकुंभ 2025 से पहले प्रयागराज में गैर सनातनियों का प्रवेश प्रतिबंधित किए जाने की मांग की है।

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ग़ैर सनातनियों के प्रवेश पर लगे रोक

उन्होंने कहा कि महाकुंभ में गैर सनातनियों का प्रवेश पूरी तरीके से प्रतिबंधित हो। गैर सनातनी लोग जिस तरीके से धर्म के प्रति अपशब्द प्रयोग करते हैं और धर्म के खिलाफ बोलते हैं ऐसे में गैर सनातनियों का प्रवेश भी पूरी तरीके से प्रतिबंधित होना चाहिए।
ऐसे लोगों को प्रयागराज आने की कोई आवश्यकता नहीं। हिंदू पीठाधीश्वर मौनी महाराज ने कहा कि महाकुंभ 2025 लगने जा रहा है।

ऐसे में गैर सनातनियों के ना आने का हम समर्थन करते हैं। इसके साथ ही अखाड़ा परिषद का जो बयान है उसका भी हम समर्थन करते। उन्होंने कहा कि जब गैर सनातनी भारत को नहीं मानते गंगा को नहीं मानते मेरे देवी-देवताओं को नहीं मानते, धर्म को नहीं मानते और मेरे मठ मंदिरों में रहकर अपशिष्ट पदार्थ का प्रयोग करते हैं, तो ऐसे लोगों को प्रयागराज आने की कोई आवश्यकता नहीं।

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