Badrinath Kedarnath, अक्षय तृतीया के शुभ मौके पर गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुल चुके हैं। अब 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने जा रहे हैं। इसी के साथ चार धाम यात्रा की शुरुआत हो रही है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है।
जोशीमठ में भव्य मेला
बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले जोशीमठ के प्रसिद्ध नरसिंह मंदिर में हर साल की तरह इस बार भी ‘वीर तिमुंडिया मेला’ आयोजित किया गया। इस मेले में शामिल होने के लिए हजारों लोग दूर-दूर से पहुंचे। बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की भीड़ में कोई कमी नहीं दिखी।
अनोखी परंपरा और भोग
इस मेले की सबसे खास बात इसकी अनोखी परंपरा है। वीर तिमुंडिया का अवतार लेने वाले व्यक्ति को खास भोग चढ़ाया जाता है। इसमें करीब 40 किलो कच्चा चावल, 10 किलो गुड़, मांस और कई घड़े पानी शामिल होते हैं। इसके बाद वह व्यक्ति आम लोगों के बीच ही इस भोग को ग्रहण करता है। यह नजारा देखने वालों के लिए बेहद अलग और चौंकाने वाला होता है।
कौन हैं वीर तिमुंडिया
वीर तिमुंडिया उत्तराखंड के चमोली जिले में पूजे जाने वाले एक प्राचीन देवता हैं। बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले नरसिंह मंदिर में उनकी पूजा द्वारपाल यानी मंदिर के रक्षक के रूप में की जाती है। हर साल इस मेले में तिमुंडिया देवता एक व्यक्ति के शरीर में अवतार लेते हैं, जिसे ‘पशवा’ कहा जाता है।
ढोल-दमाऊ के साथ आयोजन
मेले की शुरुआत में तिमुंडिया के अवतार को ढोल-दमाऊ की आवाज के साथ मंदिर परिसर में लाया जाता है। इस दौरान नवदुर्गा, भुवनेश्वरी, चंडिका और अन्य स्थानीय देवताओं की भी पूजा होती है। इसके बाद चार धाम यात्रा के सफल और सुरक्षित होने की कामना के लिए विशेष पूजा की जाती है।
हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी
देवता पूजा समिति के अध्यक्ष अनिल नंबूरी के अनुसार, यह परंपरा बहुत पुरानी है और आज भी पूरी आस्था के साथ निभाई जाती है। इस साल भी करीब 3000 से ज्यादा लोगों ने इस मेले को अपनी आंखों से देखा और पूजा में हिस्सा लिया।
क्या है पौराणिक कहानी
कहानी के अनुसार, पुराने समय में बद्रीनाथ जाने वाले रास्ते पर एक तीन सिर वाला राक्षस रहता था। वह वहां से गुजरने वाले लोगों को परेशान करता था और उनसे बलि मांगता था। जब देवी दुर्गा वहां पहुंचीं, तो उन्होंने उस राक्षस को हरा दिया। राक्षस ने माफी मांगी, तो देवी ने उसे अपना रक्षक बना दिया।
आज भी निभाई जाती परंपरा
देवी दुर्गा ने उसे वरदान दिया कि जब भी बद्रीनाथ के कपाट खुलेंगे, उससे पहले उसकी पूजा जरूर की जाएगी। तभी से हर साल इस परंपरा को निभाया जाता है। यही वजह है कि आज भी तिमुंडिया मेले का आयोजन बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ होता है।
