Chaturmas 2026: चातुर्मास में भूलकर भी न करें ये काम, जानें किन नियमों का पालन करना माना जाता है शुभ

चातुर्मास को हिंदू धर्म में साधना और संयम का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान तामसिक भोजन, विवाह, गृह प्रवेश और नए कार्यों की शुरुआत से परहेज किया जाता है। वहीं पूजा-पाठ, दान, गौसेवा और सात्विक जीवन अपनाना शुभ माना जाता है।

Chaturmas 2026 Rules: वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और अगले चार महीनों तक सृष्टि के संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव संभालते हैं। इसी कारण इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों से परहेज करने की परंपरा रही है।

चातुर्मास में किन कार्यों से बचें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के दौरान तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए। इस अवधि में सात्विक भोजन और संयमित जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है।

इसके अलावा क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या और नकारात्मक विचारों से दूरी बनाए रखना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इन आदतों का त्याग करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

इन शुभ कार्यों को टालने की परंपरा

चातुर्मास के दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, भूमि पूजन, नए भवन की नींव रखना, मुंडन और उपनयन (जनेऊ) जैसे संस्कार सामान्यतः नहीं किए जाते। साथ ही नया व्यवसाय या किसी बड़े कार्य की शुरुआत भी इस अवधि के बाद करना शुभ माना जाता है।

चातुर्मास में क्या करना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में पूजा-पाठ, जप, ध्यान और भगवान विष्णु व भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है। गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, जल, छाता, तिल और जूते-चप्पल का दान करना पुण्यदायी माना जाता है। इसके अलावा गौसेवा और गायों को हरा चारा खिलाने की भी परंपरा है।

 

 

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