दीपावली पर घरों में दीपक जलाने की परंपरा सदियों पुरानी है। इस दिन लोग अपने घर, आंगन, छत और मुख्य द्वार को दीपों से सजाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मुख्य द्वार पर दीपक जलाने की परंपरा क्यों निभाई जाती है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसका संबंध मां लक्ष्मी के स्वागत, सुख-समृद्धि और घर में सकारात्मकता लाने की कामना से जुड़ा है। हालांकि, इसके पीछे केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि प्रकाश और खुशियों का सांस्कृतिक संदेश भी छिपा है।
लक्ष्मी स्वागत की परंपरा
हिंदू धर्म में दिवाली को माता लक्ष्मी की पूजा का प्रमुख पर्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन साफ-सुथरे और रोशनी से सजे घर में माता लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है।
इसी वजह से लोग दिवाली पर घर के मुख्य द्वार को विशेष रूप से सजाते हैं। दरवाजे पर रंगोली बनाई जाती है, फूल लगाए जाते हैं और दोनों ओर दीपक जलाए जाते हैं। इसे देवी के स्वागत और घर में सुख-समृद्धि की कामना का प्रतीक माना जाता है।
अंधकार मिटाने का संदेश
दीपक जलाने का अर्थ केवल घर को रोशन करना नहीं है। भारतीय संस्कृति में प्रकाश को ज्ञान, विवेक और सकारात्मक सोच का प्रतीक माना गया है।
मुख्य द्वार पर जलता दीपक इस संदेश को दर्शाता है कि जीवन से अज्ञान, निराशा और नकारात्मकता दूर होनी चाहिए। दीपावली का पर्व भी अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है।
मेहमानों के स्वागत का संकेत
घर का मुख्य द्वार परिवार और बाहरी दुनिया के बीच संपर्क का सबसे महत्वपूर्ण स्थान होता है। इसी रास्ते से रिश्तेदार, पड़ोसी और मेहमान घर में प्रवेश करते हैं।
ऐसे में मुख्य द्वार पर दीपक जलाना स्वागत और अपनत्व की भावना को दर्शाता है। दीपों से सजा दरवाजा आने वाले लोगों के प्रति सम्मान और त्योहार की खुशियां बांटने का प्रतीक भी माना जाता है।
भगवान राम से भी संबंध
दीपावली को भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की कथा से भी जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान राम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने पूरे नगर में दीप जलाए थे।
इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज भी लोग दिवाली पर अपने घरों और मुख्य द्वार को दीपों से सजाते हैं। हालांकि, देश के अलग-अलग हिस्सों में दीपावली मनाने की धार्मिक परंपराएं और मान्यताएं अलग-अलग हैं।
कितने दीपक जलाना शुभ?
कई परिवारों में मुख्य द्वार के दोनों ओर दीपक जलाने की परंपरा है। कुछ लोग चौखट पर एक दीपक रखते हैं, जबकि कई घरों में प्रवेश मार्ग और आंगन में दीपों की कतार सजाई जाती है।
दीपकों की संख्या, उनमें तेल या घी का इस्तेमाल और उन्हें रखने का तरीका परिवार की परंपरा और स्थानीय मान्यताओं पर निर्भर करता है। ऐसा कोई एक नियम नहीं है, जिसे सभी के लिए अनिवार्य माना जाए।
धनतेरस पर किए जाने वाले यम दीपदान और दिवाली की सजावट के लिए जलाए जाने वाले दीपकों की परंपराएं भी अलग हो सकती हैं। इसलिए सोशल मीडिया पर फैलने वाले डर या अनहोनी से जुड़े दावों पर भरोसा करने के बजाय अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार दीप जलाना चाहिए।
दीप जलाते समय रखें ध्यान
दिवाली पर दीपक जलाने के साथ सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है। दीपकों को हमेशा समतल और मजबूत जगह पर रखें। उन्हें पर्दों, कागज, प्लास्टिक की सजावट और बिजली के तारों से दूर रखें।
मुख्य द्वार पर ऐसी जगह दीपक न रखें, जहां लोगों के आने-जाने में परेशानी हो या कपड़ों में आग लगने का खतरा रहे। बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दीपकों को दूर रखें। जलते हुए दीपकों को बिना निगरानी छोड़कर नहीं सोना चाहिए।

