Haldi Ceremony Significance: ज्योतिष शास्त्र में पीले रंग का संबंध बृहस्पति यानी गुरु ग्रह से माना जाता है। गुरु को विवाह, सुख और दांपत्य जीवन का कारक माना जाता है। मान्यता है कि हल्दी की रस्म से वर-वधू को गुरु ग्रह की सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है और उनके वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद
पीला रंग भगवान विष्णु का प्रिय रंग माना जाता है। उन्हें अक्सर पीतांबर धारण किए हुए दिखाया जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, विवाह जैसे शुभ कार्यों में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए हल्दी की पीली रंगत को सुख, समृद्धि और मंगल का प्रतीक माना जाता है।
सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है हल्दी
विवाह में अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं में पीला और केसरिया रंग ऊर्जा, उत्साह और नए जीवन का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से हल्दी को भी शादी से पहले सकारात्मकता और शुभता से जोड़ा जाता है।
बुरी नजर से बचाने की भी मान्यता
कई परंपराओं में हल्दी को शुद्धता और सुरक्षा से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि शादी से पहले दूल्हा-दुल्हन को हल्दी लगाने से नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर से सुरक्षा मिलती है। हालांकि, ये धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं हैं, जिनका वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
पीले कपड़े पहनने की परंपरा
हल्दी समारोह में दूल्हा और दुल्हन के पीले कपड़े पहनने की परंपरा भी इसी मान्यता से जुड़ी है। पीला रंग खुशी, उत्साह और शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि आज की आधुनिक हल्दी सेरेमनी में भी पीले रंग का खास महत्व बना हुआ है।
