Religious News:हिंदू धर्म में सप्ताह के सातों दिनों का अपना अलग-अलग धार्मिक महत्व है। हर दिन किसी न किसी देवी-देवता की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। सोमवार भगवान शिव, मंगलवार हनुमान जी और गुरुवार भगवान विष्णु की आराधना के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। वहीं शनिवार का दिन मुख्य रूप से शनिदेव को समर्पित होता है। इस दिन भक्त शनिदेव की पूजा करते हैं और उनकी कृपा पाने के लिए व्रत, दान और दीपदान जैसे धार्मिक कार्य करते हैं।
हालांकि, शनिवार को केवल शनिदेव ही नहीं, बल्कि हनुमान जी की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन बजरंगबली की आराधना करने से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा के दौरान मिलने वाली परेशानियों से राहत मिलती है। यही वजह है कि शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु हनुमान मंदिरों में दर्शन करने पहुंचते हैं।
लेकिन सवाल यह है कि आखिर शनिवार को हनुमान जी की पूजा करने का शनिदेव से क्या संबंध है? इसके पीछे एक प्रचलित पौराणिक कथा बताई जाती है, जिसका संबंध लंकापति रावण और लंका दहन से जुड़ा है।
रावण ने ग्रहों को बनाया बंदी
पौराणिक मान्यताओं और प्रचलित लोककथाओं के अनुसार, रावण बेहद शक्तिशाली होने के साथ-साथ ज्योतिष और ग्रहों की चाल का भी जानकार था। उसे अपनी शक्ति और विद्या पर बहुत अहंकार था। कहा जाता है कि उसने अपने पुत्र मेघनाद के जन्म के समय उसके भविष्य को अनुकूल बनाने के लिए ग्रहों को अपने नियंत्रण में रखने का प्रयास किया था।
इस दौरान रावण ने शनिदेव समेत कई ग्रहों को बंदी बना लिया था। उसने शनिदेव को लंका में कैद कर रखा था, ताकि उनकी प्रतिकूल दृष्टि का प्रभाव उसके परिवार और राज्य पर न पड़े।
शनिदेव के बंदी होने के कारण उन्हें काफी कष्ट सहना पड़ रहा था। इसी बीच भगवान राम की पत्नी माता सीता की खोज करते हुए हनुमान जी लंका पहुंचे।
हनुमान जी ने किया लंका दहन
जब हनुमान जी लंका पहुंचे तो उन्होंने अशोक वाटिका में माता सीता को खोज लिया और उनसे मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने माता सीता का संदेश भगवान राम तक पहुंचाने का निश्चय किया।
लेकिन जब रावण को हनुमान जी के लंका पहुंचने की जानकारी मिली तो उसने उन्हें पकड़ने का आदेश दिया। रावण के सैनिकों ने बजरंगबली को बंदी बना लिया। इसके बाद रावण ने उनकी पूंछ में आग लगाने का आदेश दिया।
रावण को लगा कि वह हनुमान जी को अपमानित कर रहा है, लेकिन बजरंगबली ने अपनी शक्ति से उसी आग को लंका के विनाश का कारण बना दिया। उन्होंने एक महल से दूसरे महल तक छलांग लगाते हुए पूरी लंका में आग लगा दी।
प्रचलित कथा के अनुसार, इसी लंका दहन के दौरान हनुमान जी की नजर बंदी बनाए गए शनिदेव पर पड़ी। उन्होंने शनिदेव को कैद से मुक्त कराया। लंबे समय तक बंधन में रहने के कारण शनिदेव काफी पीड़ा में थे। हनुमान जी ने उन्हें आजादी दिलाकर उनका कष्ट दूर किया।
शनिदेव ने दिया वरदान
कथा के अनुसार, जब शनिदेव कैद से मुक्त हुए तो वह हनुमान जी से बेहद प्रसन्न हुए। उन्होंने बजरंगबली के प्रति आभार व्यक्त किया और उनसे कोई वरदान मांगने को कहा।
इस पर हनुमान जी ने अपने लिए कुछ मांगने के बजाय अपने भक्तों के हित की बात कही। उन्होंने शनिदेव से कहा कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन और श्रद्धा से उनकी पूजा करे, उसे शनिदेव के प्रतिकूल प्रभावों के कारण परेशानियों का सामना न करना पड़े।
इसी धार्मिक मान्यता के कारण शनिवार को हनुमान जी की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। माना जाता है कि बजरंगबली की भक्ति करने वाले व्यक्ति को भय, संकट और नकारात्मक प्रभावों से लड़ने की शक्ति मिलती है।
शनिवार को ऐसे करें पूजा
शनिवार के दिन हनुमान जी की पूजा करने के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद घर के मंदिर में बजरंगबली की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा शुरू करें।
• हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें।
• लाल फूल चढ़ाएं और गुड़-चने का भोग लगाएं।
• श्रद्धापूर्वक हनुमान चालीसा का पाठ करें।
• संभव हो तो सुंदरकांड का पाठ भी करें।
• हनुमान मंदिर जाकर बजरंगबली के दर्शन करें।
• अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को दान दें।
शनि दोष से जुड़ी मान्यता
ज्योतिष शास्त्र में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा को महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि इन अवधियों में व्यक्ति को जीवन में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे समय में हनुमान जी की पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ करने की सलाह दी जाती है।
हालांकि, शनि और हनुमान जी से जुड़ी यह कथा धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित पौराणिक परंपराओं पर आधारित है। इसका मुख्य संदेश यही है कि अहंकार का अंत होता है और सच्ची भक्ति, सेवा तथा परोपकार का हमेशा महत्व रहता है।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित पौराणिक कथाओं पर आधारित है। News 1India इसकी किसी भी प्रकार का समर्थन नहीं करता है कृपया अपने विवेक का प्रयोग करें।

